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गुरुवार, 6 अगस्त 2020

73 अल - मुजम्मिल

 73 अल - मुजम्मिल 

*शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है।  

1 ऐ  कपडे में लिपटने वाले, 2 रात में खड़े हो परन्तु थोड़ा भाग। 3 आधी रात अथवा उससे कुछ कम कर दो। 4 या उससे कुछ बढ़ा दो, और कुरआन को ठहर -ठहर कर पढ़ो। 5 हम तुम पर एक भारी बात डालने वाले है। 

6  निस्संदेह रात का  उठना अत्यंत कष्टकर है और बात ठीक निकलती है।  7 निस्संदेह तुम्हे दिन में बहुत काम रहता है।  8 और अपने पालनहार का स्मरण करो और उसकी ओर ध्यान केन्द्रित कर लो सबसे अलग होकर। 9 वह पूर्व और पश्चिम का स्वामी है, उसके अतिरिक्त कोई पूज्य नहीं, अतः तुम उसको अपना संरक्षक बना लो।  10 और लोग जो कुछ कहते है उस पर धैर्य रखो और भले ढंग से उनसे अलग हो जाओ।  11 और झुठलाने वाले सम्पन्न लोगों का मामला मुझ पर छोड़ दो और उनको थोड़ी ढील दे दो। 12 हमारे पास, बेड़ियाँ हैं और नरक है। 13 और गले में फँस जाने वाला खाना है और कष्टदायक यातना है।  14 जिस दिन धरती और पहाड़ हिलने लगेंगे और पहाड़ रेत  के जैसे गिरते हुए ढेर हो जायेंगे। 

15 हमने तुम्हारी ओर एक सन्देष्टा भेजा है, तुम पर गवाह बनाकर, जिस प्रकार हमने फिरऔन की ओर एक सन्देष्टा भेजा।  16 फिर फिरऔन ने सन्देष्टा का कहा न माना तो हमने उसको पकड़ा कठोर पकड़ना। 17 तो यदि तुमने झुठलाया तुम उस दिन की यातना से कैसे बचोगे जो बच्चो को बूढ़ा कर देगी।  18 जिसमें आसमान फट जायेगा, निस्संदेह उसका वादा पूरा होकर रहेगा।  19 यह एक उपदेश है, तो जो चाहे अपने पालनहार की ओर  रास्ता अपना ले।  

20 निस्संदेह तुम्हारा पालनहार जानता है कि तुम लगभग दो तिहाई रात या आधी रात या तिहाई रात ( नमाज के लिए ) खड़े होते हो और एक समूह तुम्हारे साथियों में से भी। और अल्लाह ही रात और दिन का पैमाना (मापक्रम) ठहरता है, उसने जाना कि तुम उसको पूरा न कर सकोगे अतः उसने तुम पर कृपा की, अब कुरआन से पढ़ो जितना तुमको आसान हो।  उसने जाना की तुममें रोगी होंगे और कितने लोग अल्लाह की कृपा की खोज में धरती पर यात्रा करेंगे, और दूसरे ऐसे लोग भी होंगे जो अल्लाह के मार्ग में जिहाद करेंगे। तो इसमें से पढ़ो जितना तुमको आसान हो, और नमाज स्थापित करो और जकात (अनिवार्य दान ) अदा करों। और अल्लाह को कर्ज दो।  अच्छा कर्ज।  और जो भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे उसको अल्लाह के यहाँ मौजूद पाओगे।  वह उत्तम है और पुण्य में अधिक, और अल्लाह से क्षमा माँगो निस्संदेह अल्लाह क्षमा करने वाला, दयावान है। 

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अनुवादक - मौलाना वहीदुद्दीन खान 

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Qur'an 68:52