Follow

गुरुवार, 30 दिसंबर 2021

colour


🟪For yellow and orange colour,(symbol of distruction and fire)🟪

📗Surat No 30 : سورة الروم - Ayat No 51 

وَ لَئِنۡ  اَرۡسَلۡنَا رِیۡحًا فَرَاَوۡہُ  مُصۡفَرًّا لَّظَلُّوۡا مِنۡۢ  بَعۡدِہٖ  یَکۡفُرُوۡنَ ﴿۵۱﴾

और अगर हम एक ऐसी हवा भेज दें जिसके असर से वो अपनी खेती को ज़र्द पाएँ(74) तो वो कुफ़्र करते रह जाते हैं।(75)

Surat No. 30 Ayat NO. 51 
 But if We should send a [bad] wind and they saw [their crops] turned yellow, they would remain thereafter disbelievers. 

📗Surat No 39 : سورة الزمر - Ayat No 21 

اَلَمۡ  تَرَ  اَنَّ اللّٰہَ اَنۡزَلَ مِنَ السَّمَآءِ  مَآءً فَسَلَکَہٗ  یَنَابِیۡعَ فِی الۡاَرۡضِ ثُمَّ یُخۡرِجُ بِہٖ زَرۡعًا مُّخۡتَلِفًا  اَلۡوَانُہٗ  ثُمَّ یَہِیۡجُ  فَتَرٰىہُ مُصۡفَرًّا ثُمَّ یَجۡعَلُہٗ  حُطَامًا ؕ اِنَّ فِیۡ  ذٰلِکَ لَذِکۡرٰی لِاُولِی الۡاَلۡبَابِ ﴿٪۲۱﴾                   16

क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह ने आसमान से पानी बरसाया, फिर उसको सोतों, चश्मों और दरियाओं(38) की शक्ल में ज़मीन के अन्दर जारी किया, फिर पानी के ज़रिए से वो तरह-तरह की खेतियाँ निकालता है जिनकी क़िस्में अलग-अलग हैं, फिर वो खेतियाँ पककर सूख जाती हैं, फिर तुम देखते हो कि वो पीली पड़ गईं, फिर आख़िरकार अल्लाह उनको भुस बना देता है। हक़ीक़त में इसमें एक सबक़ है अक़ल रखनेवालों के लिये।(39)

Surat No. 39 Ayat NO. 21 
Do you not see that Allah sends down rain from the sky and makes it flow as springs [and rivers] in the earth; then He produces thereby crops of varying colors; then they dry and you see them turned yellow; then He makes them [scattered] debris. Indeed in that is a reminder for those of understanding. 


📗Surat No 57 : سورة الحديد - Ayat No 20 

اِعۡلَمُوۡۤا اَنَّمَا الۡحَیٰوۃُ  الدُّنۡیَا لَعِبٌ وَّ لَہۡوٌ وَّ زِیۡنَۃٌ  وَّ تَفَاخُرٌۢ  بَیۡنَکُمۡ وَ تَکَاثُرٌ فِی الۡاَمۡوَالِ وَ الۡاَوۡلَادِ ؕ کَمَثَلِ غَیۡثٍ اَعۡجَبَ الۡکُفَّارَ نَبَاتُہٗ  ثُمَّ یَہِیۡجُ فَتَرٰىہُ مُصۡفَرًّا ثُمَّ  یَکُوۡنُ حُطَامًا ؕ وَ فِی الۡاٰخِرَۃِ  عَذَابٌ شَدِیۡدٌ ۙ وَّ مَغۡفِرَۃٌ مِّنَ اللّٰہِ وَ رِضۡوَانٌ ؕ وَ مَا الۡحَیٰوۃُ  الدُّنۡیَاۤ   اِلَّا مَتَاعُ  الۡغُرُوۡرِ ﴿۲۰﴾

ख़ूब जान लो कि ये दुनिया की ज़िन्दगी इसके सिवा कुछ नहीं कि एक खेल और दिल-लगी और ज़ाहिरी टीप-टॉप और तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर फ़ख़्र जताना और माल व औलाद में एक-दूसरे से बढ़ जाने की कोशिश करना है। इसकी मिसाल ऐसी है जैसे एक बारिश हो गई तो उससे पैदा होनेवाली नबातात (पेड़-पौधों) को देखकर किसान ख़ुश हो गए। फिर वही खेती पक जाती है और तुम देखते हो कि वो ज़र्द हो गई। फिर वो भुस बनकर रह जाती है। इसके बरख़िलाफ़ आख़िरत वो जगह है जहाँ सख़्त अज़ाब है और अल्लाह की मग़फ़िरत और उसकी ख़ुशनूदी है। दुनिया की ज़िन्दगी एक धोखे की टट्टी के सिवा कुछ नहीं।(36)

Surat No. 57 Ayat NO. 20 
 Know that the life of this world is but amusement and diversion and adornment and boasting to one another and competition in increase of wealth and children - like the example of a rain whose [resulting] plant growth pleases the tillers; then it dries and you see it turned yellow; then it becomes [scattered] debris. And in the Hereafter is severe punishment and forgiveness from Allah and approval. And what is the worldly life except the enjoyment of delusion. 


📗Surat No 77 : سورة المرسلات - Ayat No 32 

اِنَّہَا  تَرۡمِیۡ  بِشَرَرٍ  کَالۡقَصۡرِ ﴿ۚ۳۲﴾

वो आग महल जैसी बड़ी-बड़ी चिंगारियाँ फेंकेगी

Surat No 77 : سورة المرسلات - Ayat No 33 

کَاَنَّہٗ  جِمٰلَتٌ صُفۡرٌ ﴿ؕ۳۳﴾

(जो उछलती हुई यूँ महसूस होंगी) मानो कि वो ज़र्द ऊँट हैं (19)।


Surat No. 77 Ayat NO. 32 
 Indeed, it throws sparks [as huge] as a fortress, 
Surat No. 77 Ayat NO. 33 
As if they were yellowish [black] camels.

 

🟪For GREEN colour,(symbol of peace, Janna, salamati, greenary)🟪

📗Surat No 6 : سورة الأنعام - Ayat No 99 

وَ ہُوَ الَّذِیۡۤ  اَنۡزَلَ مِنَ السَّمَآءِ مَآءً ۚ فَاَخۡرَجۡنَا بِہٖ  نَبَاتَ کُلِّ شَیۡءٍ فَاَخۡرَجۡنَا مِنۡہُ خَضِرًا نُّخۡرِجُ مِنۡہُ حَبًّا مُّتَرَاکِبًا ۚ وَ مِنَ النَّخۡلِ مِنۡ طَلۡعِہَا قِنۡوَانٌ دَانِیَۃٌ  وَّ جَنّٰتٍ مِّنۡ اَعۡنَابٍ وَّ الزَّیۡتُوۡنَ  وَ الرُّمَّانَ  مُشۡتَبِہًا وَّ غَیۡرَ مُتَشَابِہٍ ؕ اُنۡظُرُوۡۤا اِلٰی ثَمَرِہٖۤ  اِذَاۤ  اَثۡمَرَ  وَ یَنۡعِہٖ ؕ اِنَّ  فِیۡ ذٰلِکُمۡ  لَاٰیٰتٍ  لِّقَوۡمٍ  یُّؤۡمِنُوۡنَ ﴿۹۹﴾

और वही है जिसने आसमान से पानी बरसाया, फिर उसके ज़रिए से हर क़िस्म की नबातात  [ वनस्पतियाँ] उगाईं, फिर उससे हरे-हरे खेत और पेड़ पैदा किए, फिर उनसे तह पर तह चढ़े हुए दाने निकाले और खजूर के गाभों से फलों के गुच्छे पैदा किए जो बोझ के मारे झुके पड़ते हैं, और अंगूर, ज़ैतून और अनार के बाग़ लगाए जिनके फल एक-दूसरे से मिलते-जुलते भी हैं और फिर हर एक की ख़ुसूसियतें अलग-अलग भी हैं। ये पेड़ जब फलते हैं तो इनमें फल आने और फिर उनके पकने की कैफ़ियत ज़रा ग़ौर की नज़र से देखो, इन चीज़ों में निशानियाँ हैं उन लोगों के लिये जो ईमान लाते हैं।

Surat No. 6 Ayat NO. 99 
 And it is He who sends down rain from the sky, and We produce thereby the growth of all things. We produce from it greenery from which We produce grains arranged in layers. And from the palm trees - of its emerging fruit are clusters hanging low. And [We produce] gardens of grapevines and olives and pomegranates, similar yet varied. Look at [each of] its fruit when it yields and [at] its ripening. Indeed in that are signs for a people who believe. 

📗Surat No 12 : سورة يوسف - Ayat No 43 

وَ قَالَ الۡمَلِکُ اِنِّیۡۤ  اَرٰی سَبۡعَ بَقَرٰتٍ سِمَانٍ یَّاۡکُلُہُنَّ سَبۡعٌ عِجَافٌ وَّ سَبۡعَ سُنۡۢبُلٰتٍ خُضۡرٍ وَّ اُخَرَ  یٰبِسٰتٍ ؕ یٰۤاَیُّہَا الۡمَلَاُ  اَفۡتُوۡنِیۡ فِیۡ رُءۡیَایَ اِنۡ کُنۡتُمۡ لِلرُّءۡیَا تَعۡبُرُوۡنَ ﴿۴۳﴾

एक दिन  [ 36] बादशाह ने कहा, “मैंने ख़्वाब में देखा है कि सात मोटी गायें हैं जिनको सात दुबली गायें खा रही हैं और अनाज की सात बालें हरी हैं और दूसरी सात सूखी। ऐ दरबारवालो! मुझे इस ख़्वाब की ताबीर  [ स्वप्न फल] बताओ, अगर तुम ख़ाबों का मतलब समझते हो।”  [ 37]

Surat No. 12 Ayat NO. 43 
 And [subsequently] the king said, "Indeed, I have seen [in a dream] seven fat cows being eaten by seven [that were] lean, and seven green spikes [of grain] and others [that were] dry. O eminent ones, explain to me my vision, if you should interpret visions." 

📗Surat No 18 : سورة الكهف - Ayat No 31 

اُولٰٓئِکَ لَہُمۡ جَنّٰتُ عَدۡنٍ تَجۡرِیۡ مِنۡ تَحۡتِہِمُ الۡاَنۡہٰرُ یُحَلَّوۡنَ فِیۡہَا مِنۡ اَسَاوِرَ مِنۡ ذَہَبٍ وَّ یَلۡبَسُوۡنَ ثِیَابًا خُضۡرًا مِّنۡ سُنۡدُسٍ وَّ اِسۡتَبۡرَقٍ مُّتَّکِئِیۡنَ فِیۡہَا عَلَی الۡاَرَآئِکِ ؕ نِعۡمَ الثَّوَابُ ؕ وَ حَسُنَتۡ  مُرۡتَفَقًا ﴿٪۳۱﴾                  16

उनके लिये सदाबहार जन्नतें हैं, जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी। वहाँ वो सोने के कंगनों से सजाए जाएँगे। (34) बारीक रेशम और अतलस व दीबा के हरे कपड़े पहनेंगे, और ऊँची मस्नदों (35) पर तकिये लगाकर बैठेंगे। बेहतरीन बदला और आला दर्जे की रहने की जगह!

Surat No. 18 Ayat NO. 31 
Those will have gardens of perpetual residence; beneath them rivers will flow. They will be adorned therein with bracelets of gold and will wear green garments of fine silk and brocade, reclining therein on adorned couches. Excellent is the reward, and good is the resting place. 


📗Surat No 22 : سورة الحج - Ayat No 63 

اَلَمۡ  تَرَ  اَنَّ اللّٰہَ  اَنۡزَلَ  مِنَ  السَّمَآءِ  مَآءً ۫ فَتُصۡبِحُ  الۡاَرۡضُ  مُخۡضَرَّۃً ؕ اِنَّ  اللّٰہَ لَطِیۡفٌ خَبِیۡرٌ ﴿ۚ۶۳﴾

क्या तुम देखते नहीं हो कि अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है और उसकी बदौलत ज़मीन हरी-भरी हो जाती है?(110) हक़ीक़त ये है कि वो बारीकियों तक पर नज़र रखनेवाला और बहुत बाख़बर है।(111)

Surat No. 22 Ayat NO. 63 
 Do you not see that Allah has sent down rain from the sky and the earth becomes green? Indeed, Allah is Subtle and Acquainted. 

📗Surat No 36 : سورة يس - Ayat No 80 

الَّذِیۡ جَعَلَ لَکُمۡ مِّنَ الشَّجَرِ الۡاَخۡضَرِ نَارًا  فَاِذَاۤ  اَنۡتُمۡ مِّنۡہُ  تُوۡقِدُوۡنَ ﴿۸۰﴾

वही जिसने तुम्हारे लिये हरे-भरे पेड़ से आग पैदा कर दी और तुम उससे अपने चूल्हे रौशन करते हो।(68)

Surat No. 36 Ayat NO. 80 
 [It is] He who made for you from the green tree, fire, and then from it you ignite. 


📗Surat No 55 : سورة الرحمن - Ayat No 63 

فَبِاَیِّ  اٰلَآءِ  رَبِّکُمَا تُکَذِّبٰنِ ﴿ۙ۶۳﴾

अपने रब के किन-किन इनामों को तुम झुटलाओगे?

Surat No 55 : سورة الرحمن - Ayat No 64 

مُدۡہَآ  مَّتٰنِ  ﴿ۚ۶۴﴾

घने सरसब्ज़ व शादाब बाग़।(50)

Surat No. 55 Ayat NO. 63 
 So which of the favors of your Lord would you deny? - 
Surat No. 55 Ayat NO. 64 
 Dark green [in color]. 


📗Surat No 55 : سورة الرحمن - Ayat No 76 

مُتَّکِئِیۡنَ عَلٰی رَفۡرَفٍ خُضۡرٍ  وَّ عَبۡقَرِیٍّ حِسَانٍ ﴿ۚ۷۶﴾

वो जन्नती सब्ज़ क़ालीनों और बेहतरीन और ख़ूबसूरत फ़र्शों पर(52) तकिये लगा के बैठेंगे।

Surat No. 55 Ayat NO. 76 
Reclining on green cushions and beautiful fine carpets. 


📗Surat No 76 : سورة الدھر - Ayat No 21 

عٰلِیَہُمۡ  ثِیَابُ سُنۡدُسٍ خُضۡرٌ وَّ اِسۡتَبۡرَقٌ ۫ وَّ حُلُّوۡۤا  اَسَاوِرَ مِنۡ فِضَّۃٍ ۚ وَ  سَقٰہُمۡ  رَبُّہُمۡ  شَرَابًا طَہُوۡرًا ﴿۲۱﴾

उनके ऊपर बारीक रेशम के सब्ज़ लिबास और अतलस व दीबा के कपड़े (23) होंगे, उनको चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे (24), और उनका रब उनको निहायत पाकीज़ा शराब पिलाएगा (25)।

Surat No. 76 Ayat NO. 21 
Upon the inhabitants will be green garments of fine silk and brocade. And they will be adorned with bracelets of silver, and their Lord will give them a purifying drink. 

==================================

शनिवार, 25 दिसंबर 2021

मरियम अलैहिस्सलाम और ईसा अलैहिस्सलाम


बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहिम 🌴मरयम (Mary) अलैहिस्सलाम और ईसा (Jesus) अलैहिस्सलाम (पार्ट 2)
📗Surat No. 4 Ayat NO. 155 
आख़िरकार इनके वादा तोड़ने की वजह से और इस वजह से कि इन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया और बहुत-से पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल किया और यहाँ तक कहा कि हमारे दिल ग़िलाफ़ों में महफ़ूज़ हैं [ 187] – हालाँकि [ 188] हक़ीक़त में इनकी बातिलपरस्ती की वजह से अल्लाह ने इनके दिलों पर ठप्पा लगा दिया है और इसी वजह से ये बहुत कम ईमान लाते हैं

📗Surat No. 4 Ayat NO. 156 
फिर [ 189] अपने कुफ़्र और इनकार में ये इतने बढ़े कि मरयम पर सख़्त बुह्तान लगाया, [ 190]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 157 
और ख़ुद कहा कि हमने मसीह, मरयम के बेटे ईसा, अल्लाह के रसूल, का क़त्ल कर दिया है [ 191] – हालाँकि [ 192] सही बात ये है कि उन्होंने न उसको क़त्ल किया, न सूली पर चढ़ाया, बल्कि मामला उनके लिये मुश्तबह  [ सन्दिग्ध] कर दिया गया। [ 193] और जिन लोगों ने इसके बारे में इख़्तिलाफ़ किया है वो भी हक़ीक़त में शक में पड़े हुए हैं। उनके पास इस मामले में कोई इल्म नहीं है, सिर्फ़ अटकल पर चलते रहे हैं। [ 194] उन्होंने मसीह को यक़ीनन क़त्ल नहीं किया,

📗Surat No. 4 Ayat NO. 158 
बल्कि अल्लाह ने उसको अपनी तरफ़ उठा लिया, [ 195] अल्लाह ज़बरदस्त ताक़त रखनेवाला और हिकमतवाला है।

📗Surat No. 4 Ayat NO. 159 
और किताबवालों में से कोई ऐसा न होगा जो उसकी मौत से पहले उस पर ईमान न ले आएगा [ 196] और क़ियामत के दिन वो उस पर गवाही देगा। [ 197]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 160 
मतलब ये [ 198] कि इन यहूदी बन जानेवालों के इसी ज़ालिमाना रवैये की वजह से और इस वजह से कि ये बहुत ज़्यादा अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं, [ 199]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 161 
और सूद  [ ब्याज] लेते हैं जिससे इन्हें मना किया गया था, [ 200] और लोगों के माल नाजाइज़ तरीक़ों से खाते हैं, हमने बहुत-सी वो अच्छी पाक चीज़ें इनपर हराम कर दीं जो पहले इनके लिये हलाल थीं, [ 201] और जो लोग इनमें से इनकार करने वाले हैं उनके लिये हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है। [ 202]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 162 
मगर इनमें जो लोग पुख़्ता इल्म रखनेवाले हैं और ईमानदार हैं वो सब उस तालीम पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ़ नाज़िल की गई है और जो तुमसे पहले नाज़िल की गई थी। [ 203] इस तरह के ईमान लानेवाले और नमाज़ और ज़कात की पाबन्दी करनेवाले और अल्लाह और आख़िरत के दिन पर सच्चा ईमान रखनेवाले लोगों को हम ज़रूर ही बड़ा बदला देंगे।

📗Surat No. 4 Ayat NO. 163 
ऐ नबी! हमने तुम्हारी तरफ़ उसी तरह वो्य भेजी है जिस तरह नूह और उसके बाद के पैग़म्बरों की तरफ़ भेजी थी। हमने इबराहीम, इसमाईल, इसहाक़, याक़ूब और औलादे-याक़ूब, ईसा, अय्यूब, यूनुस, हारून और सुलैमान की तरफ़ वो्य भेजी। हमने दाऊद को ज़बूर दी।

📗Surat No. 4 Ayat NO. 171 
ऐ किताबवालो, अपने दीन में हद से आगे न बढ़ो [ 211] और अल्लाह से जोड़कर हक़ के सिवा कोई बात न कहो, मसीह मरयम का बेटा ईसा इसके सिवा कुछ न था कि अल्लाह का एक रसूल था और एक फ़रमान [ 212] था, जो अल्लाह ने मरयम की तरफ़ भेजा और एक रूह थी अल्लाह की तरफ़ से [ 213]  [ जिसने मरयम के पेट में बच्चे की शक्ल इख़्तियार की] तो तुम अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान [ 214] लाओ और न कहो कि ‘तीन’ हैं। [ 215] बाज़ आ जाओ, ये तुम्हारे ही लिये बेहतर है। अल्लाह तो बस एक ही खुदा है। वो पाक है इससे कि कोई उसका बेटा हो। [ 216] ज़मीन और आसमानों की सारी चीज़ों का वही मालिक है [ 217] और उनकी ज़रूरतों को पूरी करने और उनकी ख़बर रखने के लिये बस वही काफ़ी है। [ 218]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 172 
मसीह ने कभी इस बात को अपने लिये बुरा नहीं समझा कि वो अल्लाह का एक बन्दा हो, और न  [ अल्लाह के] क़रीबी फ़रिश्ते इसको अपने लिये बुरा समझते हैं। अगर कोई अल्लाह की बन्दगी को अपने लिये बुरा समझता है और घमण्ड करता है तो एक वक़्त आएगा जब अल्लाह सब को घेर कर अपने सामने हाज़िर करेगा।
(Qur'an 155-163, 171-172)
==================================

📗Surat No. 5 Ayat NO. 17 
यक़ीनन कुफ़्र किया उन लोगों ने जिन्होंने कहा कि मरयम का बेटा मसीह ही ख़ुदा है। [ 39] ऐ नबी, इनसे कहो कि अगर ख़ुदा मरयम के बेटे मसीह को और उसकी माँ और तमाम ज़मीनवालों को हलाक कर देना चाहे तो किस की मजाल है कि उसको इस इरादे से रोक सके? अल्लाह तो ज़मीन और आसमानों का और उन सब चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन और आसमानों के बीच पाई जाती हैं, जो कुछ चाहता है पैदा करता है [ 40] और उसे हर चीज़ पर क़ुदरत हासिल है। 
(Qur'an 5:17)
==================================

📗Surat No. 5 Ayat NO. 46 
फिर हमने इन पैग़म्बरों के बाद मरयम के बेटे ईसा को भेजा। तौरात में से जो कुछ उसके सामने मौजूद था वो उसकी तसदीक़ करनेवाला था। और हमने उसको इंजील दी जिसमें रहनुमाई और रौशनी थी और वो भी तौरात में से जो कुछ उस वक़्त मौजूद था उसकी तसदीक़ करनेवाली थी। [ 76] और अल्लाह से डरनेवाले लोगों के लिये सरासर हिदायत और नसीहत थी।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 47 
हमारा हुक्म था कि इंजील वाले उस क़ानून के मुताबिक़ फ़ैसला करें जो अल्लाह ने उसमें उतारा है और जो लोग अल्लाह के उतारे हुए क़ानून के मुताबिक़ फ़ैसला न करें वही फ़ासिक़ हैं। [ 77]
(Qur'an 5: 46-47)
==================================

📗Surat No. 5 Ayat NO. 72 
यक़ीनन कुफ़्र किया उन लोगों ने जिन्होंने कहा कि अल्लाह मरयम का बेटा मसीह ही है। हालाँकि मसीह ने कहा था कि “ऐ बनी-इसराईल, अल्लाह की बन्दगी करो जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी।” जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराया उस पर अल्लाह ने जन्नत हराम कर दी और उसका ठिकाना जहन्नम है और ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 73 
यक़ीनन कुफ़्र किया उन लोगों ने जिन्होंने कहा कि अल्लाह तीन में का एक है, हालाँकि एक ख़ुदा के सिवा कोई ख़ुदा नहीं है। अगर ये लोग अपनी इन बातों से बाज़ न आएँ तो इनमें से जिस-जिस ने कुफ़्र किया है उसको दर्दनाक सज़ा दी जाएगी।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 74 
फिर क्या ये अल्लाह से तौबा न करेंगे और उससे माफ़ी न माँगेंगे? अल्लाह बहुत माफ़ करनेवाला और रहम करनेवाला है।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 75 
मरयम का बेटा मसीह इसके सिवा कुछ नहीं कि बस एक रसूल था, उससे पहले और भी बहुतसे रसूल गुज़र चुके थे, उसकी माँ एक हक़परस्त (सत्यवती) औरत थी और वो दोनों खाना खाते थे। देखो, हम किस तरह उनके सामने हक़ीक़त की निशानियाँ वाज़ेह करते हैं, फिर देखो ये किधर उलटे फिरे जाते हैं। [ 100]

📗Surat No. 5 Ayat NO. 76 
इनसे कहो : क्या तुम अल्लाह को छोड़कर उसकी परस्तिश करते हो जो न तुम्हारे लिये नुक़सान का इख़्तियार रखता है और न फ़ायदे का? हालाँकि सबकी सुननेवाला और सब कुछ जाननेवाला तो अल्लाह ही है।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 77 
कहो : ऐ अहले-किताब, अपने दीन  [ धर्म] में नाहक़ हद से आगे न बढ़ो और उन लोगों के ख़यालों की पैरवी न करो जो तुमसे पहले ख़ुद गुमराह हुए और बहुतों को गुमराह किया और ‘सवाउस्सबील’ (सीधे रास्ते) से भटक गए। [ 101]

📗Surat No. 5 Ayat NO. 78 
बनी-इसराईल में से जिन लोगों ने कुफ़्र की राह इख़्तियार की उन पर दाऊद और मरयम के बेटे ईसा की ज़बान से लानत की गई, क्योंकि वो सरकश हो गए थे और ज़्यादतियाँ करने लगे थे,

📗Surat No. 5 Ayat NO. 79 
उन्होंने एक-दूसरे को बुरे कामों के करने से रोकना छोड़ दिया था। [ 102] बुरा रवैया था जो उन्होंने इख़्तियार किया।
(Qur'an 5:72-79)
==================================

📗Surat No. 5 Ayat NO. 110 
फिर तसव्वुर करो उस मौक़े का जब अल्लाह कहेगा [ 125] कि “ऐ मरयम के बेटे ईसा, याद कर मेरी उस नेमत को जो मैंने तुझे और तेरी माँ को दी थी, मैंने पाक रूह से तेरी मदद की, तू पालने में भी लोगों से बात करता था और बड़ी उम्र को पहुँचकर भी। मैंने तुझको किताब और हिकमत और तौरात और इंजील की तालीम दी, तू मेरे हुक्म से मिट्टी का पुतला परिन्दे की शक्ल का बनाता और उसमें फूँकता था और वो मेरे हुक्म से परिन्दा बन जाता था, तू पैदाइशी अन्धे और कोढ़ी को मेरे हुक्म से अच्छा करता था, तू मुर्दों को मेरे हुक्म से निकालता था, [ 126] फिर जब तू बनी-इसराईल के पास खुली-खुली निशानियाँ लेकर पहुँचा और जो लोग उनमें से हक़ का इनकार करनेवाले थे, उन्होंने कहा कि ये निशानियाँ जादूगरी के सिवा और कुछ नहीं हैं

📗Surat No. 5 Ayat NO. 111 
तो मैंने ही तुझे उनसे बचाया, और जब मैंने हवारियों को इशारा किया कि मुझपर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ तब उन्होंने कहा कि हम ईमान लाए और गवाह रहो कि हम मुस्लिम (फ़रमाँबरदार) हैं।” [ 127]

📗Surat No. 5 Ayat NO. 112 
हवारियों [ 128] के सिलसिले में ये वाक़िआ भी याद रहे कि जब हवारियों ने कहा, “ऐ मरयम के बेटे ईसा, क्या आपका रब हम पर आसमान से खाने का एक दस्तरख़ान उतार सकता है?” तो ईसा ने कहा : अल्लाह से डरो, अगर तुम ईमानवाले हो।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 113 
उन्होंने कहा : हम बस ये चाहते हैं कि उस दस्तरख़ान से खाना खाएँ और हमारे दिल मुतमइन हों और हमें मालूम हो जाए कि आपने जो कुछ हम से कहा है वो सच है और हम उस पर गवाह हों।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 114 
इस पर मरयम के बेटे ईसा ने दुआ की, “ख़ुदाया, हमारे रब, हम पर आसमान से एक दस्तरख़ान उतार जो हमारे लिये और हमारे अगलों-पिछलों के लिये ख़ुशी का मौक़ा ठहरे और तेरी तरफ़ से एक निशानी हो, हमको रोज़ी दे और तू बेहतरीन रोज़ी देनेवाला है।”

📗Surat No. 5 Ayat NO. 115 
अल्लाह ने जवाब दिया, “मैं उसको तुमपर उतारने वाला हूँ [ 129] मगर इसके बाद जो तुममें से कुफ़्र करेगा उसे मैं ऐसी सज़ा दूँगा जो दुनिया में किसी को न दी होगी।”

📗Surat No. 5 Ayat NO. 116 
मतलब ये कि जब इन एहसानों को याद दिलाकर अल्लाह फ़रमाएगा कि “ऐ मरयम के बेटे ईसा, क्या तूने लोगों से कहा था कि ख़ुदा के सिवा मुझे और मेरी माँ को भी ख़ुदा बना लो?” [ 130] तो वो जवाब में कहेगा कि “सुब्हानल्ला (अल्लाह पाक) है, मेरा ये काम न था कि वो बात कहता जिसके कहने का मुझे हक़ न था, अगर मैंने ऐसी बात कही होती तो आपको ज़रूर मालूम होता। आप जानते हैं जो कुछ मेरे दिल में है और मैं नहीं जनता जो कुछ आपके दिल में है, आप तो सारी छिपी हक़ीक़तों के जाननेवाले हैं।
(Qur'an : 110-116)
==================================
Next part tomorrow...


सुरे यासीन हिन्दी में

🌎सुरे यासीन🌎बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम (अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और रहम करनेवाला है।)
📗या-सीन(1)
📗क़सम है हिकमतवाले क़ुरआन की(2)
📗कि तुम यक़ीनन रसूलों में से हो,(3)
📗सीधे रास्ते पर हो,(4)
📗(और ये क़ुरआन) ग़ालिब और रहम करनेवाली हस्ती का उतारा हुआ है(5)
📗ताकि तुम ख़बरदार करो एक ऐसी क़ौम को जिसके बाप-दादा ख़बरदार न किये गए थे और इस वजह से वो ग़फ़लत में पड़े हुए हैं।(6)
📗इनमें से अक्सर लोग अज़ाब के फ़ैसले के हक़दार हो चुके हैं, इसी लिये वो ईमान नहीं लाते।(7)
📗हमने उनकी गर्दनों में तौक़ (पट्टे) डाल दिये हैं, जिनसे वो ठुड्डियों तक जकड़े गए हैं, इसलिये वो सर उठाए खड़े हैं।(8)
📗हमने एक दीवार उनके आगे खड़ी कर दी है और एक दीवार उनके पीछे। हमने उन्हें ढाँक दिया है, उन्हें अब कुछ नहीं सूझता।(9)
📗उनके लिये बराबर है, तुम उन्हें ख़बरदार करो या न करो, ये न मानेंगे।(10)
Surat No. 36 Ayat NO. 11 
तुम तो उसी शख़्स को ख़बरदार कर सकते हो जो नसीहत की पैरवी करे और बेदेखे रहमान ख़ुदा से डरे। उसे माफ़ी और बाइज़्ज़त बदले की ख़ुशख़बरी दे दो।










शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

मरियम

#Qur'an Night study#
🌴मरयम (Mary) अलैहिस्सलाम और ईसा(Jesus) अलैहिस्सलाम
🟪Surat No. 3 Ayat NO. 35 
 [ वो उस वक़्त सुन रहा था] जब इमरान की औरत [ 32] कह रही थी कि “मेरे पालनहार! मैं इस बच्चे को, जो मेरे पेट में है, तेरी नज़्र करती हूँ वो तेरे ही काम के लिये वक़्फ़ होगा मेरी इस पेशकश को क़बूल कर ले, तू सुनने और जाननेवाला है [ 33]।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 36 
फिर जब वो बच्ची उसके यहाँ पैदा हुई तो उसने कहा, “मालिक! मेरे यहाँ तो लड़की पैदा हो गई है – हालाँकि जो कुछ उसने जना था, अल्लाह को उसकी ख़बर थी – और लड़का लड़की की तरह नहीं होता। [ 34] ख़ैर, मैंने इसका नाम मरयम रख दिया है और मैं इसे और इसकी आगे की नस्ल को धुत्कारे हुए शैतान के फ़ितने से तेरी पनाह में देती हूँ।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 37 
आख़िरकार उसके रब ने उस लड़की को ख़ुशी के साथ क़बूल कर लिया, उसे बड़ी अच्छी लड़की बनाकर उठाया और ज़करिय्या को उसका सरपरस्त बना दिया। ज़करिय्या [ 35] जब कभी उसके पास मेहराब [ 36] में जाता तो उसके पास कुछ-न-कुछ खाने-पीने का सामान पाता। पूछता, “मरयम! ये तेरे पास कहाँ से आया?” वो जवाब देती, “अल्लाह के पास से आया है। अल्लाह जिसे चाहता है, बेहिसाब रोज़ी देता है।”
(Qur'an 3:35-37)
==================================

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 42 
फिर वो वक़्त आया जब मरयम से फ़रिश्तों ने आकर कहा, “ऐ मरयम! अल्लाह ने तुझे चुना और पाकीज़गी अता की और तमाम दुनिया की औरतों पर तुझको तरजीह देकर अपनी ख़िदमत के लिये चुन लिया।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 43 
ऐ मरयम! अपने रब के हुक्मों की पाबन्द बनकर रह, उसके आगे सर को झुका और जो बन्दे उसके सामने झुकनेवाले हैं, उनके साथ तू भी झुक जा।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 44 
ऐ नबी! ये ग़ैब  [ परोक्ष] की ख़बरें हैं जो हम तुमको वो्य के ज़रिए से बता रहे हैं, वरना तुम उस वक़्त वहाँ मौजूद न थे जब हैकल के ख़ादिम ये फ़ैसला करने के लिये कि मरयम का सरपरस्त कौन हो, अपने-अपने क़लम फेंक रहे थे, [ 43] और न तुम उस वक़्त हाज़िर थे जब उनके बीच झगड़ा खड़ा हो गया था।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 45 
और जब फ़रिश्तों ने कहा, “ऐ मरयम! अल्लाह तुझे अपने एक फ़रमान की ख़ुशख़बरी देता है। उसका नाम मसीह, मरयम का बेटा ईसा होगा, दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़तदार होगा, अल्लाह के क़रीबी बन्दों में गिना जाएगा,

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 46 
लोगों से पालने में भी बात करेगा और बड़ी उम्र को पहुँचकर भी और वो एक नेक और भला इंसान होगा।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 47 
ये सुनकर मरयम बोली, “पालनहार! मेरे यहाँ बच्चा कहाँ से होगा? मुझे तो किसी मर्द ने हाथ तक नहीं लगाया।” जवाब मिला, “ऐसा ही होगा, [ 44] अल्लाह जो चाहता है, पैदा करता है। वो जब किसी काम के करने का फ़ैसला फ़रमाता है, तो बस कहता है कि हो जा, और वो हो जाता है।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 48 
 [ फ़रिश्तों ने फिर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा] “और अल्लाह उसे किताब और हिकमत की तालीम  [ शिक्षा] देगा, तौरात और इंजील का इल्म सिखाएगा

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 49 
और बनी-इसराईल की तरफ़ अपना रसूल मुक़र्रर करेगा।”  [ और जब वो रसूल की हैसियत से बनी-इसराईल के पास आया तो उसने कहा,] “मैं तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूँ। मैं तुम्हारे सामने मिट्टी से परिन्दे की शक्ल का एक मुजस्समा  [ आकृति] बनाता हूँ और उसमें फूँक मारता हूँ, वो अल्लाह के हुक्म से परिन्दा बन जाता है। मैं अल्लाह के हुक्म से जन्मजात अन्धे और कोढ़ी को अच्छा करता हूँ और मुर्दे को ज़िन्दा करता हूँ। मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम क्या खाते हो और क्या अपने घरों में जमा करके रखते हो। इसमें तुम्हारे लिये काफ़ी निशानी है अगर तुम ईमान लानेवाले हो। [ 45]

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 50 
और मैं उस तालीम  [ शिक्षा] और हिदायत की तसदीक़  [ पुष्टि] करनेवाला बनकर आया हूँ जो तौरात में से इस वक़्त मेरे ज़माने में मौजूद है, [ 46] और इसलिये आया हूँ कि तुम्हारे लिये कुछ उन चीज़ों को हलाल कर दूँ जो तुमपर हराम कर दी गई हैं। [ 47] देखो, मैं तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूँ, इसलिये अल्लाह से डरो और मेरा कहना मानो।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 51 
अल्लाह मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, इसलिये तुम उसी की बन्दगी इख़्तियार करो, यही सीधा रास्ता है।” [ 48]

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 52 
जब ईसा ने महसूस किया कि बनी-इसराईल कुफ़्र और इनकार पर आमादा हैं तो उसने कहा, “कौन अल्लाह की राह में मेरा मददगार होता है?” हवारियों [ 49] ने जवाब दिया, “हम अल्लाह के मददगार हैं, [ 50] हम अल्लाह पर ईमान लाए, गवाह रहो कि हम मुस्लिम  [ अल्लाह के फ़रमाँबरदार] हैं।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 53 
मालिक! जो फ़रमान तूने उतारा है, हमने उसे मान लिया और रसूल की पैरवी क़बूल की। हमारा नाम गवाही देनेवालों में लिख ले।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 54 
फिर बनी-इसराईल  [ मसीह के ख़िलाफ़] ख़ुफ़िया तदबीरें करने लगे। जवाब में अल्लाह ने भी ख़ुफ़िया तदबीर की, और ऐसी तदबीरों में अल्लाह सबसे बढ़कर है।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 55 
 [ वो अल्लाह की ख़ुफ़िया तदबीर ही थी] जब उसने कहा कि “ऐ ईसा! अब मैं तुझे वापस ले लूँगा  [ 51] और तुझको अपनी तरफ़ उठा लूँगा, और जिन्होंने तेरा इनकार किया है उनसे  [ यानी उनकी संगति से और उनके गन्दे माहौल में उनके साथ रहने से] तुझे पाक कर दूँगा और तेरी पैरवी करनेवालों को क़ियामत तक उन लोगों पर हावी रखूँगा जिन्होंने तेरा इनकार किया है।  [ 52] फिर तुम सबको आख़िरकार मेरे पास आना है, उस वक़्त मैं उन बातों का फ़ैसला कर दूँगा जिनमें तुम्हारे बीच इख़्तिलाफ़ हुआ है।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 56 
जिन लोगों ने कुफ़्र और इनकार का रवैया अपनाया है, उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में सख़्त सज़ा दूँगा और वो कोई मददगार न पाएँगे,

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 57 
और जिन्होंने ईमान और नेक अमली का रवैया अपनाया है उन्हें उनके बदले पूरे-पूरे दे दिये जाएँगे, और  [ ख़ूब जान लो कि] ज़ालिमों से अल्लाह हरगिज़ मुहब्बत नहीं करता।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 58 
ऐ नबी! ये आयतों (निशानियों) और हिकमत  [ तत्वज्ञान] से भरे हुए बयान हैं जो हम तुम्हें सुना रहे हैं।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 59 
अल्लाह के नज़दीक ईसा की मिसाल आदम जैसी है कि अल्लाह ने उसे मिट्टी से पैदा किया और हुक्म दिया कि हो जा और वो हो गया। [ 53]

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 60 
ये असल हक़ीक़त है जो तुम्हारे रब की तरफ़ से बताई जा रही है, और तुम उन लोगों में शामिल न हो जो इसमें शक करते हैं। [ 54]

(Qur'an 3:42-60)
==================================
इस नीचे दी गई लिंक को दबाकर, ऐप को डाउनलोड करके पढ़े।

http://bit.ly/2SZUgdg

सोमवार, 20 दिसंबर 2021

क़ुरआन पार्ट 2

क़ुरआन में क़ुरआन के बारेमे (पार्ट 2)
📗वास्तव में यह क़ुरआन वह मार्ग दिखाता है जो सबसे सीधा है और उन मोमिनों को, जो अच्छे कर्म करते हैं, शूभ सूचना देता है कि उनके लिए बड़ा बदला है।
(17: 9 )

📗हमने इस क़ुरआन में विभिन्न ढंग से बात का स्पष्टीकरण किया कि वे चेतें, किन्तु इससे उनकी नफ़रत ही बढ़ती है। ( 17:41 )

📗जब तुम क़ुरआन पढ़ते हो तो हम तुम्हारे और उन लोगों के बीच, जो आख़िरत को नहीं मानते एक अदृश्य पर्दे की आड़ कर देते हैं। ( 45 )

और उनके दिलों पर भी परदे डाल देते हैं कि वे समझ न सकें। और उनके कानों में बोझ (कि वे सुन न सकें) । और जब तुम क़ुरआन के माध्यम से अपने रब का वर्णन उसे अकेला बताते हुए करते हो तो वे नफ़रत से अपनी पीठ फेरकर चल देते हैं। ( 46 )
(17:45-46)

📗हम क़ुरआन में से जो उतारते हैं वह मोमिनों के लिए शिफ़ा (आरोग्य) और दयालुता है, किन्तु ज़ालिमों के लिए तो वह बस घाटे ही में अभिवृद्धि करता है। 
(17: 82 )

📗कह दो, "यदि मनुष्य और जिन्न इसके लिए इकट्ठे हो जाएँ कि क़ुरआन जैसी कोई चीज़ लाएँ, तो वे इस जैसी कोई चीज़ न ला सकेंगे, चाहे वे आपस में एक-दूसरे के सहायक ही क्यों न हों।" (17: 88 )

📗हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए प्रत्येक तत्वदर्शिता की बात फेर-फेरकर बयान की, फिर भी अधिकतर लोगों के लिए इनकार के सिवा हर चीज़ अस्वीकार्य ही रही। 
( 17:89 )

📗हमने लोगों के लिए इस क़ुरआन में हर प्रकार के उत्तम विषयों को तरह-तरह से बयान किया है, किन्तु मनुष्य सबसे बढ़कर झगड़ालू है। (18: 54 )

📗ता॰ हा॰ 
हमने तुमपर यह क़ुरआन इसलिए नहीं उतारा कि तुम मशक़्क़त में पड़ जाओ। 
यह तो बस एक अनुस्मृति है, उसके लिए जो डरे, (20:1- 3 )

📗अतः सर्वोच्च है अल्लाह, सच्चा सम्राट! क़ुरआन के (फ़ैसले के) सिलसिले में जल्दी न करो, जब तक कि वह पूरा न हो जाए। तेरी ओर उसकी प्रकाशना हो रही है। और कहो, "मेरे रब, मुझे ज्ञान में अभिवृद्धि प्रदान कर।" 
(20:114 )

📗बड़ी बरकतवाला है वह जिसने यह फ़ुरक़ान अपने बन्दे पर अवतरित किया, ताकि वह सारे संसार के लिए सावधान करनेवाला हो। ( 25:1 )

📗जिन लोगों ने इनकार किया उनका कहना है, "यह तो बस मनघड़ंत है जो उसने स्वयं ही घड़ लिया है। और कुछ दूसरे लोगों ने इस काम में उसकी सहायता की है।" वे तो ज़ुल्म और झूठ ही के ध्येय से आए। (25: 4 )

📗कहो, "उसे अवतरित किया है उसने, जो आकाशों और धरती के रहस्य जानता है। निश्चय ही वह बहुत क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।" (25: 6 )

📗रसूल कहेगा, "ऐ मेरे रब! निस्संदेह मेरी क़ौम के लोगों ने इस क़ुरआन को व्यर्थ बकवास की चीज़ ठहरा लिया था।" ( 25:30 )

📗और जिन लोगों ने इनकार किया उनका कहना है कि "उसपर पूरा क़ुरआन एक ही बार में क्यों नहीं उतरा?" ऐसा इसलिए किया गया ताकि हम इसके द्वारा तुम्हारे दिल को मज़बूत रखें और हमने इसे एक उचित क्रम में रखा।( 25:32 )

📗ता॰ सीन॰। ये आयतें हैं क़ुरआन और एक स्पष्ट किताब की। (27: 1 )

📗मार्गदर्शन है और शुभ-सूचना उन ईमानवालों के लिए, 
(27: 2 )

📗निश्चय ही तुम यह क़ुरआन एक बड़े तत्वदर्शी, ज्ञानवान (प्रभु) की ओर से पा रहे हो। ( 27:6 )

📗निस्संदेह यह क़ुरआन इसराईल की सन्तान को अधिकतर ऐसी बातें खोलकर सुनाता है जिनके विषय में उनमें मतभेद है। ( 27:76 )

📗और यह कि क़ुरआन पढ़कर सुनाऊँ। अब जिस किसी ने संमार्ग ग्रहण किया वह अपने ही लिए संमार्ग ग्रहण करेगा। और जो पथभ्रष्ट रहा तो कह दो, "मैं तो बस एक सचेत करनेवाला ही हूँ।" ( 27:92 )

📗जिसने इस क़ुरआन की ज़िम्मेदारी तुमपर डाली है, वह तुम्हें उसके (अच्छे) अंजाम तक ज़रूर पहुँचाएगा। कहो, "मेरा रब उसे भली-भाँति जानता है जो मार्गदर्शन लेकर आया, और उसे भी जो खुली गुमराही में पड़ा है।" ( 28:85 )

📗हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए प्रत्येक मिसाल पेश कर दी है। यदि तुम कोई भी निशानी उनके पास ले आओ, जिन लोगों ने इनकार किया है, वे तो यही कहेंगे, "तुम तो बस झूठ घड़ते हो।" ( 30:58 )

📗 जिन लोगों ने इनकार किया वे कहते हैं, "हम इस क़ुरआन को कदापि न मानेंगे और न उसको जो इसके आगे है।" और यदि तुम देख पाते जब ज़ालिम अपने रब के सामने खड़े कर दिए जाएँगे। वे आपस में एक-दूसरे पर इल्ज़ाम डाल रहे होंगे। जो लोग कमज़ोर समझे गए वे उन लोगों से जो बड़े बनते थे कहेंगे, "यदि तुम न होते तो हम अवश्य ही ईमानवाले होते।" (34: 31 )

📗गवाह है हिकमतवाला क़ुरआन (36: 2 )

📗साद। क़सम है, याददिहानी-वाले क़ुरआन की (जिसमें कोई कमी नहीं कि धर्मविरोधी सत्य को न समझ सकें)। ( 38:1 )

📗हमने इस क़ुरआन में लोगों के लिए हर प्रकार की मिसालें पेश कर दी हैं, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें। 
(39: 27 )

📗जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने कहा, "इस क़ुरआन को सुनो ही मत और इसके बीच में शोर-ग़ुल मचाओ, ताकि तुम प्रभावी रहो।" (41:26 )

📗यदि हम उसे ग़ैर अरबी क़ुरआन बनाते तो वे कहते कि "उसकी आयतें क्यों नहीं (हमारी भाषा में) खोलकर बयान की गईं? यह क्या कि वाणी तो ग़ैर अरबी है और व्यक्ति अरबी?" कहो, "वह उन लोगों के लिए जो ईमान लाए मार्गदर्शन और आरोग्य है, किन्तु जो लोग ईमान नहीं ला रहे हैं उनके कानों में बोझ है और वह (क़ुरआन) उनके लिए अन्धापन (सिद्ध हो रहा) है, वे ऐसे हैं जिनको किसी दूर के स्थान से पुकारा जा रहा हो।" ( 41:44 )

📗और (जैसे हम स्पष्ट आयतें उतारते हैं) उसी प्रकार हमने तुम्हारी ओर एक अरबी क़ुरआन की प्रकाशना की है, ताकि तुम बस्तियों के केन्द्र (मक्का) को और जो लोग उसके चतुर्दिक हैं उनको सचेत कर दो और सचेत करो इकट्ठा होने के दिन से, जिसमें कोई सन्देह नहीं। एक गरोह जन्नत में होगा और एक गरोह भड़कती आग में। 
(42: 7 )

📗 वे कहते हैं, "यह क़ुरआन इन दो बस्तियों के किसी बड़े आदमी पर क्यों नहीं अवतरित हुआ?" (43:31)
==================================


शनिवार, 18 दिसंबर 2021

क़ुरआन

Bismillah. क़ुरआन को क़ुरआन से ही जाने...
🟩  क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते? यदि यह अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की ओर से होता, तो निश्चय ही वे इसमें बहुत-सी बेमेल बातें पाते। (4:82 )

🟩ऐ किताबवालो! हमारा रसूल तुम्हारे पास आ गया है। किताब की जो कुछ बातें तुम छिपाते थे, उसमें से बहुत-सी बातें वह तुम्हारे सामने खोल रहा है और बहुत-सी बातों को छोड़ देता है। तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से प्रकाश और एक स्पष्ट किताब आ गई है,

जिसके द्वारा अल्लाह उस व्यक्ति को जो उसकी प्रसन्नता का अनुगामी है, सलामती की राहें दिखा रहा है और अपनी अनुज्ञा से ऐसे लोगों को अँधेरों से निकालकर उजाले की ओर ला रहा है और उन्हें सीधे मार्ग पर चला रहा है। (5:15 -16 )

🟩  जब क़ुरआन पढ़ा जाए तो उसे ध्यानपूर्वक सुनो और चुप रहो, ताकि तुमपर दया की जाए। (7:204 )

🟩 निस्संदेह अल्लाह ने ईमानवालों से उनके प्राण और उनके माल इसके बदले में ख़रीद लिए हैं कि उनके लिए जन्नत है। वे अल्लाह के मार्ग में लड़ते हैं, तो वे मारते भी हैं और मारे भी जाते हैं। यह उसके ज़िम्मे तौरात, इनजील और क़ुरआन में (किया गया) एक पक्का वादा है। और अल्लाह से बढ़कर अपने वादे को पूरा करनेवाला हो भी कौन सकता है? अतः अपने उस सौदे पर खु़शियाँ मनाओ, जो सौदा तुमने उससे किया है। और यही सबसे बड़ी सफलता है।(9: 111 )

🟩और जब उनके सामने हमारी खुली हुई आयतें पढ़ी जाती हैं तो वे लोग, जो हमसे मिलने की आशा नहीं रखते, कहते हैं, "इसके सिवा कोई और क़ुरआन ले आओ या इसमें कुछ परिवर्तन करो।" कह दो, "मुझसे यह नहीं हो सकता कि मैं अपनी ओर से इसमें कोई परिवर्तन करूँ। मैं तो बस उसका अनुपालन करता हूँ, जो प्रकाशना मेरी ओर अवतरित की जाती है। यदि मैं अपने प्रभु की अवज्ञा करूँ तो इसमें मुझे एक बड़े दिन की यातना का भय है।"( 10:15 )

🟩यह क़ुरआन ऐसा नहीं है कि अल्लाह से हटकर घड़ लिया जाए, बल्कि यह तो जिसके समक्ष है, उसकी पुष्टि में है और किताब का विस्तार है, जिसमें किसी संदेह की गुंजाइश नहीं। यह सारे संसार के रब की ओर से है। (10:37 )
 
🟩(उन्हें कोई शंका है) या वे कहते हैं कि "उसने इसे स्वयं घड़ लिया है?" कह दो, "अच्छा, यदि तुम सच्चे हो तो इस जैसी घड़ी हुई दस सूरतें ले आओ और अल्लाह से हटकर जिस किसी को बुला सकते हो बुला लो।" 

फिर यदि वे तुम्हारी बात न मानें तो जान लो, यह अल्लाह के ज्ञान ही के साथ अवतरित हुआ है। और यह कि उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। तो अब क्या तुम मुस्लिम (आज्ञाकारी) होते हो? ( 11:13-14 )

🟩 अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। ये स्पष्ट किताब की आयतें हैं। 
हमने इसे अरबी क़ुरआन के रूप में उतारा है, ताकि तुम समझो। 
इस क़ुरआन की तुम्हारी ओर प्रकाशना करके इसके द्वारा हम तुम्हें एक बहुत ही अच्छा बयान सुनाते हैं, यद्यपि इससे पहले तुम बेख़बर थे। ( 12:1-3 )

🟩  हमने तुम्हें सात 'मसानी' का समूह यानी महान क़ुरआन दिया- (15: 87 )

🟩 अतः जब तुम क़ुरआन पढ़ने लगो तो फिटकारे हुए शैतान से बचने के लिए अल्लाह की पनाह माँग लिया करो। 
उसका तो उन लोगों पर कोई ज़ोर नहीं चलता जो ईमान लाए और अपने रब पर भरोसा रखते हैं। ( 16:98-99 )
==================================
To be continued... 

Qur'an 68:52