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मंगलवार, 21 जुलाई 2020

71 नूह

71 नूह 
*शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है। 
1 हमने नूह को उसकी कौम की ओर सन्देष्टा बनाकर भेजा कि अपनी कौम के लोगों को सचेत कर दो इससे पहले कि उनपर एक पीड़ादायक यातना आ जाये। 2 उसने कहा  कि ऐ मेरी कौम के लोगों, मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट डराने वाला हूँ।  3 कि तुम अल्लाह की उपासना करो और उससे डरो और मेरा आज्ञापालन करो।  4  अल्लाह तुम्हारे पापो को क्षमा कर देगा और तुम्हें एक निर्धारित अवधि तक अवसर देगा।  निस्संदेह जब अल्लाह का निर्धारित किया हुआ समय आ जाता है तो फिर वह टाला नहीं जाता। काश, तुम उसे जानते। 
5 नूह ने कहा कि ऐ मेरे पालनहार, मैंने अपने कौम को रात व दिन पुकारा।  6 परन्तु मेरी पुकार ने उनकी दूरी में ही वृद्धि की।  7 और मैंने जब भी उन्हें बुलाया कि तू उन्हें क्षमा कर दे तो उन्होंने अपने कानों में उँगलियाँ डाल लीं और अपने ऊपर अपने कपडे लपेट लिए और हठ पर अड़ गए और अत्यधिक घमंड किया। 8 फिर मैंने उन्हें खुलकर पुकारा।  9 फिर मैंने उनके बीच सार्वजानिक प्रचार किया उन्हें चुपके से समझाया।  10 मैंने कहा कि अपने पालनहार से क्षमा माँगो , निस्सन्देह वह बड़ा क्षमावान है।  11 वह तुम पर आसमान से पर्याप्त पानी बरसायेगा। 12 और तुम्हारी संपत्ति और संतान में वृद्धि करेगा। और तुम्हारे लिए बाग पैदा करेगा। और तुम्हारे लिए नहरें बहा देगा।  13 तुमको क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की महानता को मानते नहीं हो।  14 यद्यपि उसने तुमको तरह -तरह से बनाया।  15 क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस प्रकार सात आसमान एक पर एक बनाये। 16 और उनमें चाँद को प्रकाश और सूरज को दीपक बनाया। 17 और अल्लाह ने तुमको धरती से विशेष ढंग से उगाया।  18 फिर वह तुमको धरती में वापस ले जायेगा। और फिर उससे तुमको बाहर ले आएगा। 20 ताकि तुम उसके खुले रास्तों में चलो। 
21 नूह ने कहा कि ऐ मेरे पालनहार, इन्होंने मेरा कहा न माना और ऐसे व्यक्तियों का अनुसरण किया जिनकी संपत्ति और संतान ने उनके घाटे ही में वृद्धि की।  22 और इन्होंने बड़े षड़यंत्र किए।  23 और इन्होंने कहा कि अपने उपास्यों को कदापि न छोड़ना।  और तुम कदापि न छोड़ना वद को और न सुवाअ को और न यग़ूस को और यऊक़ को और नस्र को। 24 और उन्होने बहुत लोगों को भटका दिया।  और अब तू इन पथभ्रष्ट लोगों की पथभ्रष्टता ही में वृद्धि कर।  25 अपने पापों के कारण वह डुबाये गए फिर वह आग में डाल दिए गए।  तो उन्होंने अपने लिए अल्लाह से बचाने वाला कोई सहायक न पाया।26 और नूह ने कहा कि ऐ मेरे पालनहार, तू इन अवज्ञाकारियों में से कोई धरती पर बसने वाला न छोड़।  27 यदि तूने इनको छोड़ दिया।  तो यह तेरे बन्दों को भटकायेंगे और इनके वंश से जो भी पैदा होगा, वह व्यभिचारी और कठोर अवज्ञाकारी ही होगा।  २८ ऐ मेरे पालनहार, मुझे क्षमा कर दे। और मेरे माता-पिता को क्षमा कर दे। और जो मेरे घर में आस्थावान होकर प्रवेश हो, तू उसे भी क्षमा कर।  और सभी आस्थावान मर्दों और आस्थावान महिलाओं को क्षमा कर दे और अत्याचारियों के लिए विनाश के अतिरिक्त किस चीज़ में वृद्धि न कर।

शनिवार, 18 जुलाई 2020

70 अल - मआरिज

70 अल - मआरिज 
*शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है।  
1 माँगनेवाले  ने यातना माँगी घटित होने वाली।  2 अवज्ञाकारियों लिए कोई उसको हटाने वाला नहीं।  3 अल्लाह की ओर से जो सीढ़ियों का स्वामी है। 4 उसकी ओर फ़रिश्ते और जिब्रील चढ़कर जाते है, एक ऐसे दिन में जिसकी अवधि पचास हजार वर्ष के समान है। 5  अतः तुम धैर्य रखो, अच्छा धैर्य। 6 वह उसको दूर देखते है।  7 और हम उसको निकट देख रहे है।  8 जिस दिन आकाश तेल की तलछट की तरह हो जायेगा।  9 और पहाड़ धुनें हुए ऊन की तरह।  10 और कोई मित्र किसी मित्र को न पूछेगा। 11 वह उनको दिखाये जायेंगे।  अपराधी चाहेगा कि काश, उस दिन की यातना से बचने के लिए अपने बेटों।  12 और अपने पत्नी और अपने भाई।  13 और अपने परिवार को जो उसे शरण देने वाला था।  14 और सम्पूर्ण धरती वालों को अर्थदंड में देकर अपने आप को बचा ले। 
15  कदापि नहीं, वह तो भड़कती हुई आग की लपट होगी।  16 जो चमडी उतार देगी।  17 वह प्रत्येक उस व्यक्ति को बुलायेगी जिसने पीठ फेरा और मुँह मोड़ा। 18 एकत्र किया और सैंत कर रखा।  19  निस्सन्देह मनुष्य निम्न साहसवाला पैदा हुआ है। 20 जब उसको कष्ट पहुँचता है तो वह घबड़ा उठता है 21 और जब उसको सम्पन्नता मिलती है तो वह कृपणता करने लगता है।  22 परन्तु वह नमाज पढ़नेवाले।  23 जो अपनी  नमाज को नियमित रूप से अदा करते। 24 और जिनकी पूँजी में निश्चित अधिकार है।  25  माँगने वानले और वंचित का। 26 और जो न्याय के दिन पर विश्वास रखते हैं। 27 और जो अपने पालनहार की यातना से डरते है।  28 निस्संदेह उनके पालनहार की यातना से किसी को निडर न होना चाहिए।  और जो अपने गुप्तांगो की रक्षा करते है।  30 परन्तु अपने पत्नियों से या अपने अधिकृत महिलाओ से ( विवाह के उपरांत ), अतः उन पर उनको कोई निंदा नहीं।  31 फिर जो व्यक्ति इसके अतिरिक्त कुछ और चाहे तो वही लोग सीमा का उललघंन करनेवाले है।  32 और जो अपनी अमानतों और अपने प्रतिज्ञा को निभाते हैं। 33 और जो अपने गवाहियों पर अटल रहते है।  34 और जो अपनी नमाज की रक्षा करते है।  यही लोग जन्नतो में सम्मान के साथ होंगे। 
36 फिर इन अवज्ञाकारियों को क्या हो गया है कि वे तुम्हारी ओर दौड़े चले आ रहे है, 37 दाएँ से और बाएँ से समूह के समूह।  38 क्या उनमें से हर व्यक्ति यह लालच रखता है कि वह नेमत के बाग में प्रवेश कर लिया जायेगा।  38 कदापि नहीं, हमने उन्हें पैदा किया है उस चीज से जिससे वे परिचित है।  
40 अतः नहीं, मैं सौगंध खाता हूँ पूर्वों और पश्चिमों के पालनहार की, हम इस पर सक्षम हैं  41 कि बदल कर उनसे अच्छा ले आएँ, और हम विवश नहीं है।  42 अतः उन्हें छोड़ दो की वे बातें बनाये और खेल-तमाशे करे, यहाँ तक कि अपने उस दिन का सामना करे जिसका उनसे वादा किया जा रहा है। 43 जिस दिन कब्रों से निकल पड़ेंगे दौड़ते हुए, जैसे कि वह किसी लक्ष्य की ओर भाग रहे हो। 44 उनकी निगाहें नीची होंगी। उनपर अपमान छाया होगा, यह है वह दिन जिसका उनसे वादा था। 
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अनुवादक- मौलाना वहीदुद्दीन खान 

रविवार, 5 जुलाई 2020

69 अल- हाक्कह

69 अल-हाक्कह
*शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है। 
1 वह होनेवाली। 2  क्या है वह होने वाली। 3  और तुम क्या जानो कि क्या है वह होनेवाली। 4 समूद और आद ने उस खड़खडाने वाली चीज़ को झुठलाया। अतः समूद, तो वह एक भयानक दुर्घटना से नष्ट कर दिए गए। 6 और आद, तो वह एक प्रचंड हवा से नष्ट किये गए। 7 उसको अल्लाह ने निरंतर सात रात और आठ दिन उन पर लगाए रखा, तो तुम देखते हो कि वहाँ वह इस प्रकार गिरे हुए पड़े है मानो कि वह खजूरों के खोखले तने हो। 8 तो क्या तुमको उनमें से कोई बचा हुआ दिखाई देता है।  9 और फिरऔन और उससे पहले वालों ने और उलटी हुई बस्तियों ने अपराध किया। 10 उन्होंने अपने पालनहार के सन्देष्टा की अवज्ञा की तो अल्लाह ने उनको बहुत कठोर पकड़ा। 11 और जब पानी सीमा से बढ़ गया तो हमने तुमको नौका में सवार कराया।  12 ताकि हम उसको तुम्हारे लिए स्मृति बना दे। और याद रखने वाले कान उसको याद रखे। 
13 अतः जब सूर (महाशंख) में अचानक फूंक मारी जाएगी। 14 और धरती और पहाड़ों को उठाकर एक ही बार में कण कण कर दिया जायेगा। 15 तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी। 16 और आकाश फट जायेगा तो वह उस दिन पूर्णतः क्षीण हो जायेगा। 17 और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे, और तेरे पालनहार के सिंहासन को उस दिन आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाये होंगे।  18 उस दिन तुम पेश किये जाओगे। तुम्हारी कोई बात छिपी हुई न होगी। 
19 तो जिस व्यक्ति को उसका कर्म पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया जायेगा तो वह कहेगा कि लो मेरा कर्म पत्र पढ़ो।  20 मैंने कल्पना की थी कि मुझको मेरा हिसाब दिया जानेवाला है। तो वह एक पसंदीदा सुखमय जीवन में होगा। 22 ऊँचे बाग़ में। 23 उसके फल झुके पड रहे होंगे।  24 खाओ और पियो आनंदपूर्वक, उन कर्मो के बदले में जो तुमने बीते दिनों में किये है।  25 और जिस व्यक्ति का कर्म पत्र उसके बाये हाथ में दिया जायेगा, तो वह कहेगा-काश मेरा कर्म पत्र मुझे न दिया जाता। 26  और मै न जानता कि मेरा हिसाब क्या है। 27 काश वही मृत्यु अंतिम होती। 28 मेरी संपत्ति मेरे काम न आयी।  29 मेरी सत्ता समाप्त हो गयी।  30 उस व्यक्ति को पकडो, फिर उसको पट्टा पहनाओ। 31 फिर उसको नरक में डाल दो। 32 फिर एक जंजीर में जिसकी लम्बाई सत्तर हाथ है उसको जकड दो। 33 यह व्यक्ति महान अल्लाह पर विश्वास न रखता था। 34 और वह निर्धनों को खाना खिलाने पर नहीं उभारता था। 35 अतः आज यहाँ उसके साथ कोई सहानुभूति रखने वाला नहीं। 36 और घावों के धोवन के अतिरिक्त उसके लिए कोई खाना नहीं।  37 उसको पापियों के अतिरिक्त कोई न खायेगा। 
38 तो नहीं, मै सौगंध खाता हूँ उन चीजों की जिनको तुम देखते हो। 39 और जिनको तुम नहीं देखते।  40 निस्संदेह यह एक सम्मानित संदेशवाहक की वाणी है। 41 और वह किसी कवी की वाणी नहीं, तुम बहुत कम आस्थावान बनते हो। 42 और यह किसी भविष्यवक्ता की वाणी नहीं, तुम बहुत कम चिंतन करते हो। 43 संसार के स्वामी की ओर से उतारा है। 44 और यदि वह कोई बात गढ़ कर हमारे ऊपर लगाता, 45 तो हम उसका दाहिना हाथ पकड़ते। 46 फिर हम उसके दिल की नस काट देते। 47 फिर तुममे से कोई इससे हमको रोकने वाला न होता। 48 और निस्संदेह यह अनुस्मरण है डरने वालों के लिए। 49 और हम जानते है कि तुममे इसके झुठलाने वाले है। 50 और वह झुठलाने वालों के लिए पछतावा है। 51 और यह निश्चित सत्य है। 52 अतः तुम अपने महान पालनहार के नाम की स्तुति करों। 
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अनुवादक - मौलाना वहीदुद्दीन खान  

Qur'an 68:52