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शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

मरियम

#Qur'an Night study#
🌴मरयम (Mary) अलैहिस्सलाम और ईसा(Jesus) अलैहिस्सलाम
🟪Surat No. 3 Ayat NO. 35 
 [ वो उस वक़्त सुन रहा था] जब इमरान की औरत [ 32] कह रही थी कि “मेरे पालनहार! मैं इस बच्चे को, जो मेरे पेट में है, तेरी नज़्र करती हूँ वो तेरे ही काम के लिये वक़्फ़ होगा मेरी इस पेशकश को क़बूल कर ले, तू सुनने और जाननेवाला है [ 33]।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 36 
फिर जब वो बच्ची उसके यहाँ पैदा हुई तो उसने कहा, “मालिक! मेरे यहाँ तो लड़की पैदा हो गई है – हालाँकि जो कुछ उसने जना था, अल्लाह को उसकी ख़बर थी – और लड़का लड़की की तरह नहीं होता। [ 34] ख़ैर, मैंने इसका नाम मरयम रख दिया है और मैं इसे और इसकी आगे की नस्ल को धुत्कारे हुए शैतान के फ़ितने से तेरी पनाह में देती हूँ।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 37 
आख़िरकार उसके रब ने उस लड़की को ख़ुशी के साथ क़बूल कर लिया, उसे बड़ी अच्छी लड़की बनाकर उठाया और ज़करिय्या को उसका सरपरस्त बना दिया। ज़करिय्या [ 35] जब कभी उसके पास मेहराब [ 36] में जाता तो उसके पास कुछ-न-कुछ खाने-पीने का सामान पाता। पूछता, “मरयम! ये तेरे पास कहाँ से आया?” वो जवाब देती, “अल्लाह के पास से आया है। अल्लाह जिसे चाहता है, बेहिसाब रोज़ी देता है।”
(Qur'an 3:35-37)
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🟪Surat No. 3 Ayat NO. 42 
फिर वो वक़्त आया जब मरयम से फ़रिश्तों ने आकर कहा, “ऐ मरयम! अल्लाह ने तुझे चुना और पाकीज़गी अता की और तमाम दुनिया की औरतों पर तुझको तरजीह देकर अपनी ख़िदमत के लिये चुन लिया।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 43 
ऐ मरयम! अपने रब के हुक्मों की पाबन्द बनकर रह, उसके आगे सर को झुका और जो बन्दे उसके सामने झुकनेवाले हैं, उनके साथ तू भी झुक जा।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 44 
ऐ नबी! ये ग़ैब  [ परोक्ष] की ख़बरें हैं जो हम तुमको वो्य के ज़रिए से बता रहे हैं, वरना तुम उस वक़्त वहाँ मौजूद न थे जब हैकल के ख़ादिम ये फ़ैसला करने के लिये कि मरयम का सरपरस्त कौन हो, अपने-अपने क़लम फेंक रहे थे, [ 43] और न तुम उस वक़्त हाज़िर थे जब उनके बीच झगड़ा खड़ा हो गया था।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 45 
और जब फ़रिश्तों ने कहा, “ऐ मरयम! अल्लाह तुझे अपने एक फ़रमान की ख़ुशख़बरी देता है। उसका नाम मसीह, मरयम का बेटा ईसा होगा, दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़तदार होगा, अल्लाह के क़रीबी बन्दों में गिना जाएगा,

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 46 
लोगों से पालने में भी बात करेगा और बड़ी उम्र को पहुँचकर भी और वो एक नेक और भला इंसान होगा।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 47 
ये सुनकर मरयम बोली, “पालनहार! मेरे यहाँ बच्चा कहाँ से होगा? मुझे तो किसी मर्द ने हाथ तक नहीं लगाया।” जवाब मिला, “ऐसा ही होगा, [ 44] अल्लाह जो चाहता है, पैदा करता है। वो जब किसी काम के करने का फ़ैसला फ़रमाता है, तो बस कहता है कि हो जा, और वो हो जाता है।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 48 
 [ फ़रिश्तों ने फिर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा] “और अल्लाह उसे किताब और हिकमत की तालीम  [ शिक्षा] देगा, तौरात और इंजील का इल्म सिखाएगा

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 49 
और बनी-इसराईल की तरफ़ अपना रसूल मुक़र्रर करेगा।”  [ और जब वो रसूल की हैसियत से बनी-इसराईल के पास आया तो उसने कहा,] “मैं तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूँ। मैं तुम्हारे सामने मिट्टी से परिन्दे की शक्ल का एक मुजस्समा  [ आकृति] बनाता हूँ और उसमें फूँक मारता हूँ, वो अल्लाह के हुक्म से परिन्दा बन जाता है। मैं अल्लाह के हुक्म से जन्मजात अन्धे और कोढ़ी को अच्छा करता हूँ और मुर्दे को ज़िन्दा करता हूँ। मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम क्या खाते हो और क्या अपने घरों में जमा करके रखते हो। इसमें तुम्हारे लिये काफ़ी निशानी है अगर तुम ईमान लानेवाले हो। [ 45]

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 50 
और मैं उस तालीम  [ शिक्षा] और हिदायत की तसदीक़  [ पुष्टि] करनेवाला बनकर आया हूँ जो तौरात में से इस वक़्त मेरे ज़माने में मौजूद है, [ 46] और इसलिये आया हूँ कि तुम्हारे लिये कुछ उन चीज़ों को हलाल कर दूँ जो तुमपर हराम कर दी गई हैं। [ 47] देखो, मैं तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम्हारे पास निशानी लेकर आया हूँ, इसलिये अल्लाह से डरो और मेरा कहना मानो।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 51 
अल्लाह मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी, इसलिये तुम उसी की बन्दगी इख़्तियार करो, यही सीधा रास्ता है।” [ 48]

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 52 
जब ईसा ने महसूस किया कि बनी-इसराईल कुफ़्र और इनकार पर आमादा हैं तो उसने कहा, “कौन अल्लाह की राह में मेरा मददगार होता है?” हवारियों [ 49] ने जवाब दिया, “हम अल्लाह के मददगार हैं, [ 50] हम अल्लाह पर ईमान लाए, गवाह रहो कि हम मुस्लिम  [ अल्लाह के फ़रमाँबरदार] हैं।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 53 
मालिक! जो फ़रमान तूने उतारा है, हमने उसे मान लिया और रसूल की पैरवी क़बूल की। हमारा नाम गवाही देनेवालों में लिख ले।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 54 
फिर बनी-इसराईल  [ मसीह के ख़िलाफ़] ख़ुफ़िया तदबीरें करने लगे। जवाब में अल्लाह ने भी ख़ुफ़िया तदबीर की, और ऐसी तदबीरों में अल्लाह सबसे बढ़कर है।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 55 
 [ वो अल्लाह की ख़ुफ़िया तदबीर ही थी] जब उसने कहा कि “ऐ ईसा! अब मैं तुझे वापस ले लूँगा  [ 51] और तुझको अपनी तरफ़ उठा लूँगा, और जिन्होंने तेरा इनकार किया है उनसे  [ यानी उनकी संगति से और उनके गन्दे माहौल में उनके साथ रहने से] तुझे पाक कर दूँगा और तेरी पैरवी करनेवालों को क़ियामत तक उन लोगों पर हावी रखूँगा जिन्होंने तेरा इनकार किया है।  [ 52] फिर तुम सबको आख़िरकार मेरे पास आना है, उस वक़्त मैं उन बातों का फ़ैसला कर दूँगा जिनमें तुम्हारे बीच इख़्तिलाफ़ हुआ है।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 56 
जिन लोगों ने कुफ़्र और इनकार का रवैया अपनाया है, उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में सख़्त सज़ा दूँगा और वो कोई मददगार न पाएँगे,

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 57 
और जिन्होंने ईमान और नेक अमली का रवैया अपनाया है उन्हें उनके बदले पूरे-पूरे दे दिये जाएँगे, और  [ ख़ूब जान लो कि] ज़ालिमों से अल्लाह हरगिज़ मुहब्बत नहीं करता।”

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 58 
ऐ नबी! ये आयतों (निशानियों) और हिकमत  [ तत्वज्ञान] से भरे हुए बयान हैं जो हम तुम्हें सुना रहे हैं।

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 59 
अल्लाह के नज़दीक ईसा की मिसाल आदम जैसी है कि अल्लाह ने उसे मिट्टी से पैदा किया और हुक्म दिया कि हो जा और वो हो गया। [ 53]

🟪Surat No. 3 Ayat NO. 60 
ये असल हक़ीक़त है जो तुम्हारे रब की तरफ़ से बताई जा रही है, और तुम उन लोगों में शामिल न हो जो इसमें शक करते हैं। [ 54]

(Qur'an 3:42-60)
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Qur'an 68:52