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बुधवार, 19 अगस्त 2020

आदम अलैहिस्सलाम इनकी सच्ची कहानी... कुरान में से...

(30) और जब तेरे पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा कि मैं पृथ्वी में एक ख़लीफा (उत्तराधिकारी) बनाने वाला हूँ। फ़रिश्तों ने कहा: क्या तू पृथ्वी पर ऐसे लोगों को बसाएगा जो उसमें फ़साद करें और खून बहायें। और हम तेरी प्रशंसा करते हैं और तेरी पवित्रता बयान करते हैं। अल्लाह ने कहा, मैं वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते, (31) और अल्लाह ने सिखा दिये आदम को सारे नाम, फिर उनको फ़रिश्तों के समक्ष प्रस्तुत किया और कहा कि यदि तुम सच्चे हो तो मुझे इन लोगों के नाम बताओ। (32) फ़रिश्तों ने कहा कि तू पवित्र है। हम तो वही जानते हैं जो तूने हमको बताया। निस्सन्देह, तू ही ज्ञान वाला और तत्त्वदर्शी है। (33) अल्लाह ने कहा ऐ आदम, उनको बताओ उन लोगों के नाम। तो जब आदम ने बताये उनको उन लोगों के नाम तो अल्लाह ने कहा क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि आसमानों और पृथ्वी के भेद को मैं ही जानता हूँ। और मुझको ज्ञात है जो कुछ तुम प्रकट करते हो और जो कुछ तुम छिपाते हो।

(34) और जब हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करो, तो उन्होंने सज्दा किया, परन्तु इबलीस ने सजदा न किया। उसने अवज्ञा की और घमण्ड किया और अवज्ञाकारियों में से हो गया। (35) और हमने कहा ऐ आदम! तुम और तुम्हारी पत्नी दोनों जन्नत (स्वर्ग के बाग़) में रहो और उसमें से खाओ इच्छाभर, जहाँ से चाहो। और उस वृक्ष के निकट मत जाना अन्यथा तुम अत्याचारियों (ज़ालिमों) में से हो जाओगे। (36) फिर शैतान (इबलीस) ने उस वृक्ष के माध्यम से दोनों को विचलित कर दिया और उनको उस आनंदमय जीवन से निकाल दिया जिसमें वह थे। और हमने कहा तुम सब उतरो यहाँ से। तुम एक दूसरे के दुश्मन (शत्रु) होगे। और तुम्हारें लिए पृथ्वी में ठहरना और काम चलाना है एक अवधि तक।

(37) फिर आदम ने सीख लिये अपने पालनहार से कुछ बोल (शब्द) तो अल्लाह ने उस पर दया की। निस्सन्देह वह तौबा (क्षमा-याचना) को स्वीकार करने वाला, दया करने वाला है। (38) फिर हमने कहा तुम सब यहाँ से उतरो। फिर जब आये तुम्हारे पास मेरी ओर से कोई मार्गदर्शन तो जो लोग मेरे मार्गदर्शन का अनुसरण करेंगे, उनके लिए न कोई डर होगा और न वह शोकाकुल होंगे। (39) और जो लोग अवज्ञा करेंगे और हमारी निशानियों को झुठलायेंगे तो वही लोग नरक वाले हैं, वह उसमें सदैव रहेंगे।

(11) और हमने तुमको पैदा किया, फिर हमने तुम्हारा रूप बनाया। फिर फरिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करो। अतः उन्होंने सजदा किया। परन्तु इबलीस सजदा करने वालां में सम्मिलित न हुआ। (12) अल्लाह ने कहा कि तुझे किस चीज ने सजदा करने से रोका, जबकि मैने तुझको आदेश दिया था। इबलीस ने कहा कि मैं इससे अच्छा हूँ। तूने मुझको आग से बनाया है और आदम को मिट्टी से। (13) अल्लाह ने कहा कि तू उतर यहाँ से। तुझे यह अधिकार नहीं कि तू इसमें घमण्ड करे। अतः निकल जा निश्चित रूप से तू अपमानित है। (14) इबलीस ने कहा कि उस दिन तक कि लिए तू मुझे अवसर दे जबकि सब लोग उठाये जायेंगे। (15) अल्लाह ने कहा कि तुझको अवसर दिया गया। (16) इबलीस ने कहा चूंकि तूने मुझे भटकाया है, मैं भी लोगों के लिए तेरे सीधे मार्ग पर बैठूँगा। (17) फिर उन पर आऊँगा उनके सामने से और उनके पीछे से और उनके दायें से और उनके बायं से और तू उनमें से अधिकतर को आभार व्यक्त करने वाला न पायेगा। (18) अल्लाह ने कहा कि निकल यहाँ से अपमानित और तिरस्कृत। जो कोई इनमें से तेरे मार्ग पर चलेगा तो मैं तुम सबसे नरक को भर दूंगा।

(19) और ऐ आदम, तुम और तुम्हारी पत्नी जन्नत में रहो और खाओ जहाँ से चाहो परन्तु इस वृक्ष के पास न जाना अन्यथा तुम घाटा उठाने वालों में से हो जाओगे। (20) फिर शैतान ने दोनों को भ्रमित किया ताकि वह खोल दे उनके वह लज्जा के स्थान जो उनसे छिपाये गये थे। उसने उनसे कहा कि तुम्हारे पालनकत्र्ता ने तुमको इस वृक्ष से मात्र इसलिए रोका है कि कहीं तुम दोनों फ़रिश्ता न बन जाओ अथवा तुमको सदैव का जीवन प्राप्त हो जाये। (21) और उसने सौगन्ध खाकर कहा कि मैं तुम दोनों का शुभचिन्तक हूँ।

(22) अतः उसने झुका लिया उनको धोखे से। फिर जब दोनो ने वृक्ष का फल चखा तो उनके लज्जा के स्थान उन पर खुल गये। और वह अपने को बाग़ के पत्तों से ढाँकने लगे और उनके पालनहार ने उनको पुकारा कि क्या मैने तुम्हं इस वृक्ष से मना नहीं किया था और यह नहीं कहा था कि शैतान तुम्हारा प्रत्यक्ष शत्रु है। (23) उन्होने कहा, ऐ हमारे पालनहार, हमने अपने आप पर अत्याचार किया और यदि तू हमको क्षमा न करे और हम पर दया न करे तो हम घाटा उठाने वालों में से हो जायेंगे। (24) अल्लाह ने कहा, उतरो, तुम एक दूसरे के शत्रु रहोगे और तुम्हारे लिए धरती पर एक विशेष अन्तराल तक ठहरना और लाभ उठाना है। (25) अल्लाह ने कहा इसी में तुम जिओगे और इसी में तुम मरोगे और इसी से तुम

निकाले जाओगे।
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(71) जब तुम्हारे पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा कि मैं मिट्टी से एक मनुष्य बनाने वाला हूँ। (72) फिर जब मैं उसको ठीक कर लूँ ओर उसमें अपनी आत्मा फूँक दूँ तो तुम उसके आगे सजदे में गिर पड़ना। (73) अतः सभी फ़रिश्तों ने सजदा किया। (74) परन्तु इबलीस कि उसने घमण्ड किया। और वह अवज्ञा करने वालों में से हो गया। (75) फ़रमाया कि ऐ इबलीस, किस चीज़ ने तुझको रोक दियाः कि तू इसको सजदा करे जिसको मैने अपने दोनो हाथो से बनाया। यह तूने घमण्ड किया या तू बड़े दर्जों वालों में से है।

(76) उसने कहा कि मैं आदम से श्रेष्ठ हूँ। तूने मुझको आग से पैदा किया है। और इसको मिट्टी से। (77) फ़रमाया कि तू यहाँ से निकल जा, क्योंकि तू तिरस्कृत है। (78) और तुझ पर मेरा धिक्कार है बदले के दिन तक।  

(79) इबलीस ने कहा कि ऐ मेरे पालनहार, मुझको अवकाश दे उस दिन तक के लिए जब लोग पुनः उठाये जायेंगे। (80) फ़रमाया कि तुझको अवकाश दिया गया। (81) निर्धारित समय के लिए। (82) उसने कहा कि तेरे सम्मान की सौगन्ध, मैं उन सबको भटकाकर रहूँगा। (83) सिवाय तेरे उन बन्दों के जिन्हें तूने शुद्ध कर लिया है। (84) फ़रमाया, तो सच्चाई यह है और मैं सत्य ही कहता हूँ। (85) कि मैं नरक को तुझसे और उन समस्त लोगों से भर दूँगा जो उनमें से तेरा अनुसरण करेंगे।

गुरुवार, 6 अगस्त 2020

73 अल - मुजम्मिल

 73 अल - मुजम्मिल 

*शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है।  

1 ऐ  कपडे में लिपटने वाले, 2 रात में खड़े हो परन्तु थोड़ा भाग। 3 आधी रात अथवा उससे कुछ कम कर दो। 4 या उससे कुछ बढ़ा दो, और कुरआन को ठहर -ठहर कर पढ़ो। 5 हम तुम पर एक भारी बात डालने वाले है। 

6  निस्संदेह रात का  उठना अत्यंत कष्टकर है और बात ठीक निकलती है।  7 निस्संदेह तुम्हे दिन में बहुत काम रहता है।  8 और अपने पालनहार का स्मरण करो और उसकी ओर ध्यान केन्द्रित कर लो सबसे अलग होकर। 9 वह पूर्व और पश्चिम का स्वामी है, उसके अतिरिक्त कोई पूज्य नहीं, अतः तुम उसको अपना संरक्षक बना लो।  10 और लोग जो कुछ कहते है उस पर धैर्य रखो और भले ढंग से उनसे अलग हो जाओ।  11 और झुठलाने वाले सम्पन्न लोगों का मामला मुझ पर छोड़ दो और उनको थोड़ी ढील दे दो। 12 हमारे पास, बेड़ियाँ हैं और नरक है। 13 और गले में फँस जाने वाला खाना है और कष्टदायक यातना है।  14 जिस दिन धरती और पहाड़ हिलने लगेंगे और पहाड़ रेत  के जैसे गिरते हुए ढेर हो जायेंगे। 

15 हमने तुम्हारी ओर एक सन्देष्टा भेजा है, तुम पर गवाह बनाकर, जिस प्रकार हमने फिरऔन की ओर एक सन्देष्टा भेजा।  16 फिर फिरऔन ने सन्देष्टा का कहा न माना तो हमने उसको पकड़ा कठोर पकड़ना। 17 तो यदि तुमने झुठलाया तुम उस दिन की यातना से कैसे बचोगे जो बच्चो को बूढ़ा कर देगी।  18 जिसमें आसमान फट जायेगा, निस्संदेह उसका वादा पूरा होकर रहेगा।  19 यह एक उपदेश है, तो जो चाहे अपने पालनहार की ओर  रास्ता अपना ले।  

20 निस्संदेह तुम्हारा पालनहार जानता है कि तुम लगभग दो तिहाई रात या आधी रात या तिहाई रात ( नमाज के लिए ) खड़े होते हो और एक समूह तुम्हारे साथियों में से भी। और अल्लाह ही रात और दिन का पैमाना (मापक्रम) ठहरता है, उसने जाना कि तुम उसको पूरा न कर सकोगे अतः उसने तुम पर कृपा की, अब कुरआन से पढ़ो जितना तुमको आसान हो।  उसने जाना की तुममें रोगी होंगे और कितने लोग अल्लाह की कृपा की खोज में धरती पर यात्रा करेंगे, और दूसरे ऐसे लोग भी होंगे जो अल्लाह के मार्ग में जिहाद करेंगे। तो इसमें से पढ़ो जितना तुमको आसान हो, और नमाज स्थापित करो और जकात (अनिवार्य दान ) अदा करों। और अल्लाह को कर्ज दो।  अच्छा कर्ज।  और जो भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे उसको अल्लाह के यहाँ मौजूद पाओगे।  वह उत्तम है और पुण्य में अधिक, और अल्लाह से क्षमा माँगो निस्संदेह अल्लाह क्षमा करने वाला, दयावान है। 

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अनुवादक - मौलाना वहीदुद्दीन खान 

72 अल - जिन्न

72  अल - जिन्न 
* शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है। 
1 कहो कि मुझे वह्य (सन्देश ) की गई है कि जिन्नो के एक समूह ने कुरआन सुना तो उन्होंने कहा कि हमने एक विचित्र कुरान सुना है। 2 जो मार्गदर्शन है तो हम उस पर ईमान लाये और हम अपने पालनहार के साथ किसी को साझीदार न बनायेंगे। 3 और यह कि हमारे पालनहार का गौरव बहुत उच्च है। उसने न  कोई पत्नी बनायीं है और न संतान। 4 और यह कि हमारा नासमझ व्यक्ति अल्लाह के सम्बन्ध में बहुत वास्तविकता विरोधी बाते कहता था।  5 और हमने कल्पना की थी कि मनुष्य और जिन्न, अल्लाह के सम्बन्ध में कभी   
झूठ बात न कहेंगे। और यह कि मनुष्यों में कुछ ऐसे थे।  जो जिन्नों में से कुछ की शरण लेते थे, तो उन्होंने जिन्नों  अभिमान और बढ़ा दिया।  7 और यह कि उन्होंने भी कल्पना की, जैसे तुम्हारी कल्पना थी कि अल्लाह किसी को न उठाएगा।  
8 और हमने आसमान का निरीक्षण किया तो हमने पाया कि वह कठोर पहरेदारों और उल्काओ से भरा हुआ है। 9  और हम उसके कुछ ठिकानों में सुनने के लिए बैठा करते  थे,  तो अब जो कोई सुनना चाहता है तो वह  अपने लिए एक तैयार उल्का पाता है। 10 और हम नहीं जानते कि यह धरती वालों के लिए कोई बुराई चाही गयी है अथवा उनके पालनहार ने उनके साथ भलाई चाही है।  11  और यह कि हममें कुछ भले हैं और कुछ भिन्न प्रकार के।  हम विभिन्न मार्गों पर हैं।  12  और यह कि हमने समझ लिया कि हम धरती में अल्लाह को पराजित नहीं कर सकते।  और न भाग कर उसको पराजित कर सकते है। 13  और यह कि हमने जब उपदेश की बात सुनी तो हम उसपर ईमान  लाये।  तो जो व्यक्ति अपने पालनहार पर ईमान लाएगा तो उसको न किसी कमी का डर होगा और अधिकता का।  14 और यह कि हममें कुछ आज्ञाकारी हैं और हममें कुछ मार्गविहीन हैं, अतः जिसने आज्ञापालन किया तो उन्होंने भलाई का मार्ग ढूँढ लिया। 15 और जो लोग मार्गविहीन हैं तो वह नरक के ईंधन होंगे। 
16 और मुझे वह्य (सन्देश) की गई हैं कि यह लोग यदि मार्ग पर अटल हो जाते तो हम इनको बाहुल्यता प्रदान करते। 17 ताकि उसमें उनकी परीक्षा लें, और जो व्यक्ति अपने पालनहार की याद से मुँह मोडेगा तो वह उसको कठोर यातना में दाल देगा। 18 और यह की मस्जिदें अल्लाह के लिए है तो तुम अल्लाह के साथ किसी और को न पुकारो।  19 और यह कि जब अल्लाह का बंदा उसको पुकारने के लिए खड़ा हुआ तो लोग उसपर टूट पड़ने के लिए तैयार हो गए। 20 क्योंकि मैं मात्र अपने पालनहार को पुकारता हूँ और उसके साथ किसी को साझी नहीं करता।  21 कहो कि मैं तुम लोगों के लिए न किसी हानि का अधिकार रखता हूँ और न किसी भलाई का।  22 कहो कि मुझको अल्लाह से कोई बचा नहीं सकता।  और न मैं उसके अतिरिक्त कोई शरण पा सकता हूँ।  23 मात्र अल्लाह ही की ओर से पहुँचा देना और उसके संदेशों को अदा कर देना है और जो व्यक्ति अल्लाह और उसके सन्देष्टा की अवज्ञा करेगा तो उसके लिए नरक की आग है।  जिसमें वह सदैव रहेंगे।  
24 यहाँ तक कि जब वह देखेंगे उस चीज़ को जिसका उनसे वादा किया जा रहा है तो वह जान लेंगे कि किसके सहायक कमजोर है। और कौन संख्या में कम हैं।  25 कहो कि मैं नहीं जानता कि जिस चीज़ का तुमसे वादा किया जा रहा है, वह निकट है या मेरे पालनहार ने उसके लिए लम्बी अवधि निर्धारित कर रखी है। 26 परोक्ष का जानने वाला वही है। वह अपने परोक्ष पर किसी को सूचित नहीं करता। 27 सिवा इस सन्देष्टा के जिसको उसने पसंद किया तो, तो वह उसके आगे और पीछे रक्षक लगा देता है।  28 ताकि अल्लाह जान ले कि उन्होंने अपने पालनहार के सन्देश पहुंचा दिए है और वह उनके वातावरण को घेरे हुए है और उसने हर चीज़ को गिन रखा है।  
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अनुवादक-मौलाना वहीदुद्दीन खान 

Qur'an 68:52