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शनिवार, 25 दिसंबर 2021

मरियम अलैहिस्सलाम और ईसा अलैहिस्सलाम


बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहिम 🌴मरयम (Mary) अलैहिस्सलाम और ईसा (Jesus) अलैहिस्सलाम (पार्ट 2)
📗Surat No. 4 Ayat NO. 155 
आख़िरकार इनके वादा तोड़ने की वजह से और इस वजह से कि इन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया और बहुत-से पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल किया और यहाँ तक कहा कि हमारे दिल ग़िलाफ़ों में महफ़ूज़ हैं [ 187] – हालाँकि [ 188] हक़ीक़त में इनकी बातिलपरस्ती की वजह से अल्लाह ने इनके दिलों पर ठप्पा लगा दिया है और इसी वजह से ये बहुत कम ईमान लाते हैं

📗Surat No. 4 Ayat NO. 156 
फिर [ 189] अपने कुफ़्र और इनकार में ये इतने बढ़े कि मरयम पर सख़्त बुह्तान लगाया, [ 190]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 157 
और ख़ुद कहा कि हमने मसीह, मरयम के बेटे ईसा, अल्लाह के रसूल, का क़त्ल कर दिया है [ 191] – हालाँकि [ 192] सही बात ये है कि उन्होंने न उसको क़त्ल किया, न सूली पर चढ़ाया, बल्कि मामला उनके लिये मुश्तबह  [ सन्दिग्ध] कर दिया गया। [ 193] और जिन लोगों ने इसके बारे में इख़्तिलाफ़ किया है वो भी हक़ीक़त में शक में पड़े हुए हैं। उनके पास इस मामले में कोई इल्म नहीं है, सिर्फ़ अटकल पर चलते रहे हैं। [ 194] उन्होंने मसीह को यक़ीनन क़त्ल नहीं किया,

📗Surat No. 4 Ayat NO. 158 
बल्कि अल्लाह ने उसको अपनी तरफ़ उठा लिया, [ 195] अल्लाह ज़बरदस्त ताक़त रखनेवाला और हिकमतवाला है।

📗Surat No. 4 Ayat NO. 159 
और किताबवालों में से कोई ऐसा न होगा जो उसकी मौत से पहले उस पर ईमान न ले आएगा [ 196] और क़ियामत के दिन वो उस पर गवाही देगा। [ 197]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 160 
मतलब ये [ 198] कि इन यहूदी बन जानेवालों के इसी ज़ालिमाना रवैये की वजह से और इस वजह से कि ये बहुत ज़्यादा अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं, [ 199]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 161 
और सूद  [ ब्याज] लेते हैं जिससे इन्हें मना किया गया था, [ 200] और लोगों के माल नाजाइज़ तरीक़ों से खाते हैं, हमने बहुत-सी वो अच्छी पाक चीज़ें इनपर हराम कर दीं जो पहले इनके लिये हलाल थीं, [ 201] और जो लोग इनमें से इनकार करने वाले हैं उनके लिये हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है। [ 202]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 162 
मगर इनमें जो लोग पुख़्ता इल्म रखनेवाले हैं और ईमानदार हैं वो सब उस तालीम पर ईमान लाते हैं जो तुम्हारी तरफ़ नाज़िल की गई है और जो तुमसे पहले नाज़िल की गई थी। [ 203] इस तरह के ईमान लानेवाले और नमाज़ और ज़कात की पाबन्दी करनेवाले और अल्लाह और आख़िरत के दिन पर सच्चा ईमान रखनेवाले लोगों को हम ज़रूर ही बड़ा बदला देंगे।

📗Surat No. 4 Ayat NO. 163 
ऐ नबी! हमने तुम्हारी तरफ़ उसी तरह वो्य भेजी है जिस तरह नूह और उसके बाद के पैग़म्बरों की तरफ़ भेजी थी। हमने इबराहीम, इसमाईल, इसहाक़, याक़ूब और औलादे-याक़ूब, ईसा, अय्यूब, यूनुस, हारून और सुलैमान की तरफ़ वो्य भेजी। हमने दाऊद को ज़बूर दी।

📗Surat No. 4 Ayat NO. 171 
ऐ किताबवालो, अपने दीन में हद से आगे न बढ़ो [ 211] और अल्लाह से जोड़कर हक़ के सिवा कोई बात न कहो, मसीह मरयम का बेटा ईसा इसके सिवा कुछ न था कि अल्लाह का एक रसूल था और एक फ़रमान [ 212] था, जो अल्लाह ने मरयम की तरफ़ भेजा और एक रूह थी अल्लाह की तरफ़ से [ 213]  [ जिसने मरयम के पेट में बच्चे की शक्ल इख़्तियार की] तो तुम अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान [ 214] लाओ और न कहो कि ‘तीन’ हैं। [ 215] बाज़ आ जाओ, ये तुम्हारे ही लिये बेहतर है। अल्लाह तो बस एक ही खुदा है। वो पाक है इससे कि कोई उसका बेटा हो। [ 216] ज़मीन और आसमानों की सारी चीज़ों का वही मालिक है [ 217] और उनकी ज़रूरतों को पूरी करने और उनकी ख़बर रखने के लिये बस वही काफ़ी है। [ 218]

📗Surat No. 4 Ayat NO. 172 
मसीह ने कभी इस बात को अपने लिये बुरा नहीं समझा कि वो अल्लाह का एक बन्दा हो, और न  [ अल्लाह के] क़रीबी फ़रिश्ते इसको अपने लिये बुरा समझते हैं। अगर कोई अल्लाह की बन्दगी को अपने लिये बुरा समझता है और घमण्ड करता है तो एक वक़्त आएगा जब अल्लाह सब को घेर कर अपने सामने हाज़िर करेगा।
(Qur'an 155-163, 171-172)
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📗Surat No. 5 Ayat NO. 17 
यक़ीनन कुफ़्र किया उन लोगों ने जिन्होंने कहा कि मरयम का बेटा मसीह ही ख़ुदा है। [ 39] ऐ नबी, इनसे कहो कि अगर ख़ुदा मरयम के बेटे मसीह को और उसकी माँ और तमाम ज़मीनवालों को हलाक कर देना चाहे तो किस की मजाल है कि उसको इस इरादे से रोक सके? अल्लाह तो ज़मीन और आसमानों का और उन सब चीज़ों का मालिक है जो ज़मीन और आसमानों के बीच पाई जाती हैं, जो कुछ चाहता है पैदा करता है [ 40] और उसे हर चीज़ पर क़ुदरत हासिल है। 
(Qur'an 5:17)
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📗Surat No. 5 Ayat NO. 46 
फिर हमने इन पैग़म्बरों के बाद मरयम के बेटे ईसा को भेजा। तौरात में से जो कुछ उसके सामने मौजूद था वो उसकी तसदीक़ करनेवाला था। और हमने उसको इंजील दी जिसमें रहनुमाई और रौशनी थी और वो भी तौरात में से जो कुछ उस वक़्त मौजूद था उसकी तसदीक़ करनेवाली थी। [ 76] और अल्लाह से डरनेवाले लोगों के लिये सरासर हिदायत और नसीहत थी।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 47 
हमारा हुक्म था कि इंजील वाले उस क़ानून के मुताबिक़ फ़ैसला करें जो अल्लाह ने उसमें उतारा है और जो लोग अल्लाह के उतारे हुए क़ानून के मुताबिक़ फ़ैसला न करें वही फ़ासिक़ हैं। [ 77]
(Qur'an 5: 46-47)
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📗Surat No. 5 Ayat NO. 72 
यक़ीनन कुफ़्र किया उन लोगों ने जिन्होंने कहा कि अल्लाह मरयम का बेटा मसीह ही है। हालाँकि मसीह ने कहा था कि “ऐ बनी-इसराईल, अल्लाह की बन्दगी करो जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी।” जिसने अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराया उस पर अल्लाह ने जन्नत हराम कर दी और उसका ठिकाना जहन्नम है और ऐसे ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 73 
यक़ीनन कुफ़्र किया उन लोगों ने जिन्होंने कहा कि अल्लाह तीन में का एक है, हालाँकि एक ख़ुदा के सिवा कोई ख़ुदा नहीं है। अगर ये लोग अपनी इन बातों से बाज़ न आएँ तो इनमें से जिस-जिस ने कुफ़्र किया है उसको दर्दनाक सज़ा दी जाएगी।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 74 
फिर क्या ये अल्लाह से तौबा न करेंगे और उससे माफ़ी न माँगेंगे? अल्लाह बहुत माफ़ करनेवाला और रहम करनेवाला है।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 75 
मरयम का बेटा मसीह इसके सिवा कुछ नहीं कि बस एक रसूल था, उससे पहले और भी बहुतसे रसूल गुज़र चुके थे, उसकी माँ एक हक़परस्त (सत्यवती) औरत थी और वो दोनों खाना खाते थे। देखो, हम किस तरह उनके सामने हक़ीक़त की निशानियाँ वाज़ेह करते हैं, फिर देखो ये किधर उलटे फिरे जाते हैं। [ 100]

📗Surat No. 5 Ayat NO. 76 
इनसे कहो : क्या तुम अल्लाह को छोड़कर उसकी परस्तिश करते हो जो न तुम्हारे लिये नुक़सान का इख़्तियार रखता है और न फ़ायदे का? हालाँकि सबकी सुननेवाला और सब कुछ जाननेवाला तो अल्लाह ही है।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 77 
कहो : ऐ अहले-किताब, अपने दीन  [ धर्म] में नाहक़ हद से आगे न बढ़ो और उन लोगों के ख़यालों की पैरवी न करो जो तुमसे पहले ख़ुद गुमराह हुए और बहुतों को गुमराह किया और ‘सवाउस्सबील’ (सीधे रास्ते) से भटक गए। [ 101]

📗Surat No. 5 Ayat NO. 78 
बनी-इसराईल में से जिन लोगों ने कुफ़्र की राह इख़्तियार की उन पर दाऊद और मरयम के बेटे ईसा की ज़बान से लानत की गई, क्योंकि वो सरकश हो गए थे और ज़्यादतियाँ करने लगे थे,

📗Surat No. 5 Ayat NO. 79 
उन्होंने एक-दूसरे को बुरे कामों के करने से रोकना छोड़ दिया था। [ 102] बुरा रवैया था जो उन्होंने इख़्तियार किया।
(Qur'an 5:72-79)
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📗Surat No. 5 Ayat NO. 110 
फिर तसव्वुर करो उस मौक़े का जब अल्लाह कहेगा [ 125] कि “ऐ मरयम के बेटे ईसा, याद कर मेरी उस नेमत को जो मैंने तुझे और तेरी माँ को दी थी, मैंने पाक रूह से तेरी मदद की, तू पालने में भी लोगों से बात करता था और बड़ी उम्र को पहुँचकर भी। मैंने तुझको किताब और हिकमत और तौरात और इंजील की तालीम दी, तू मेरे हुक्म से मिट्टी का पुतला परिन्दे की शक्ल का बनाता और उसमें फूँकता था और वो मेरे हुक्म से परिन्दा बन जाता था, तू पैदाइशी अन्धे और कोढ़ी को मेरे हुक्म से अच्छा करता था, तू मुर्दों को मेरे हुक्म से निकालता था, [ 126] फिर जब तू बनी-इसराईल के पास खुली-खुली निशानियाँ लेकर पहुँचा और जो लोग उनमें से हक़ का इनकार करनेवाले थे, उन्होंने कहा कि ये निशानियाँ जादूगरी के सिवा और कुछ नहीं हैं

📗Surat No. 5 Ayat NO. 111 
तो मैंने ही तुझे उनसे बचाया, और जब मैंने हवारियों को इशारा किया कि मुझपर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ तब उन्होंने कहा कि हम ईमान लाए और गवाह रहो कि हम मुस्लिम (फ़रमाँबरदार) हैं।” [ 127]

📗Surat No. 5 Ayat NO. 112 
हवारियों [ 128] के सिलसिले में ये वाक़िआ भी याद रहे कि जब हवारियों ने कहा, “ऐ मरयम के बेटे ईसा, क्या आपका रब हम पर आसमान से खाने का एक दस्तरख़ान उतार सकता है?” तो ईसा ने कहा : अल्लाह से डरो, अगर तुम ईमानवाले हो।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 113 
उन्होंने कहा : हम बस ये चाहते हैं कि उस दस्तरख़ान से खाना खाएँ और हमारे दिल मुतमइन हों और हमें मालूम हो जाए कि आपने जो कुछ हम से कहा है वो सच है और हम उस पर गवाह हों।

📗Surat No. 5 Ayat NO. 114 
इस पर मरयम के बेटे ईसा ने दुआ की, “ख़ुदाया, हमारे रब, हम पर आसमान से एक दस्तरख़ान उतार जो हमारे लिये और हमारे अगलों-पिछलों के लिये ख़ुशी का मौक़ा ठहरे और तेरी तरफ़ से एक निशानी हो, हमको रोज़ी दे और तू बेहतरीन रोज़ी देनेवाला है।”

📗Surat No. 5 Ayat NO. 115 
अल्लाह ने जवाब दिया, “मैं उसको तुमपर उतारने वाला हूँ [ 129] मगर इसके बाद जो तुममें से कुफ़्र करेगा उसे मैं ऐसी सज़ा दूँगा जो दुनिया में किसी को न दी होगी।”

📗Surat No. 5 Ayat NO. 116 
मतलब ये कि जब इन एहसानों को याद दिलाकर अल्लाह फ़रमाएगा कि “ऐ मरयम के बेटे ईसा, क्या तूने लोगों से कहा था कि ख़ुदा के सिवा मुझे और मेरी माँ को भी ख़ुदा बना लो?” [ 130] तो वो जवाब में कहेगा कि “सुब्हानल्ला (अल्लाह पाक) है, मेरा ये काम न था कि वो बात कहता जिसके कहने का मुझे हक़ न था, अगर मैंने ऐसी बात कही होती तो आपको ज़रूर मालूम होता। आप जानते हैं जो कुछ मेरे दिल में है और मैं नहीं जनता जो कुछ आपके दिल में है, आप तो सारी छिपी हक़ीक़तों के जाननेवाले हैं।
(Qur'an : 110-116)
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Next part tomorrow...


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Qur'an 68:52