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रविवार, 5 जुलाई 2020

69 अल- हाक्कह

69 अल-हाक्कह
*शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है। 
1 वह होनेवाली। 2  क्या है वह होने वाली। 3  और तुम क्या जानो कि क्या है वह होनेवाली। 4 समूद और आद ने उस खड़खडाने वाली चीज़ को झुठलाया। अतः समूद, तो वह एक भयानक दुर्घटना से नष्ट कर दिए गए। 6 और आद, तो वह एक प्रचंड हवा से नष्ट किये गए। 7 उसको अल्लाह ने निरंतर सात रात और आठ दिन उन पर लगाए रखा, तो तुम देखते हो कि वहाँ वह इस प्रकार गिरे हुए पड़े है मानो कि वह खजूरों के खोखले तने हो। 8 तो क्या तुमको उनमें से कोई बचा हुआ दिखाई देता है।  9 और फिरऔन और उससे पहले वालों ने और उलटी हुई बस्तियों ने अपराध किया। 10 उन्होंने अपने पालनहार के सन्देष्टा की अवज्ञा की तो अल्लाह ने उनको बहुत कठोर पकड़ा। 11 और जब पानी सीमा से बढ़ गया तो हमने तुमको नौका में सवार कराया।  12 ताकि हम उसको तुम्हारे लिए स्मृति बना दे। और याद रखने वाले कान उसको याद रखे। 
13 अतः जब सूर (महाशंख) में अचानक फूंक मारी जाएगी। 14 और धरती और पहाड़ों को उठाकर एक ही बार में कण कण कर दिया जायेगा। 15 तो उस दिन घटित होने वाली घटित हो जाएगी। 16 और आकाश फट जायेगा तो वह उस दिन पूर्णतः क्षीण हो जायेगा। 17 और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे, और तेरे पालनहार के सिंहासन को उस दिन आठ फ़रिश्ते अपने ऊपर उठाये होंगे।  18 उस दिन तुम पेश किये जाओगे। तुम्हारी कोई बात छिपी हुई न होगी। 
19 तो जिस व्यक्ति को उसका कर्म पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया जायेगा तो वह कहेगा कि लो मेरा कर्म पत्र पढ़ो।  20 मैंने कल्पना की थी कि मुझको मेरा हिसाब दिया जानेवाला है। तो वह एक पसंदीदा सुखमय जीवन में होगा। 22 ऊँचे बाग़ में। 23 उसके फल झुके पड रहे होंगे।  24 खाओ और पियो आनंदपूर्वक, उन कर्मो के बदले में जो तुमने बीते दिनों में किये है।  25 और जिस व्यक्ति का कर्म पत्र उसके बाये हाथ में दिया जायेगा, तो वह कहेगा-काश मेरा कर्म पत्र मुझे न दिया जाता। 26  और मै न जानता कि मेरा हिसाब क्या है। 27 काश वही मृत्यु अंतिम होती। 28 मेरी संपत्ति मेरे काम न आयी।  29 मेरी सत्ता समाप्त हो गयी।  30 उस व्यक्ति को पकडो, फिर उसको पट्टा पहनाओ। 31 फिर उसको नरक में डाल दो। 32 फिर एक जंजीर में जिसकी लम्बाई सत्तर हाथ है उसको जकड दो। 33 यह व्यक्ति महान अल्लाह पर विश्वास न रखता था। 34 और वह निर्धनों को खाना खिलाने पर नहीं उभारता था। 35 अतः आज यहाँ उसके साथ कोई सहानुभूति रखने वाला नहीं। 36 और घावों के धोवन के अतिरिक्त उसके लिए कोई खाना नहीं।  37 उसको पापियों के अतिरिक्त कोई न खायेगा। 
38 तो नहीं, मै सौगंध खाता हूँ उन चीजों की जिनको तुम देखते हो। 39 और जिनको तुम नहीं देखते।  40 निस्संदेह यह एक सम्मानित संदेशवाहक की वाणी है। 41 और वह किसी कवी की वाणी नहीं, तुम बहुत कम आस्थावान बनते हो। 42 और यह किसी भविष्यवक्ता की वाणी नहीं, तुम बहुत कम चिंतन करते हो। 43 संसार के स्वामी की ओर से उतारा है। 44 और यदि वह कोई बात गढ़ कर हमारे ऊपर लगाता, 45 तो हम उसका दाहिना हाथ पकड़ते। 46 फिर हम उसके दिल की नस काट देते। 47 फिर तुममे से कोई इससे हमको रोकने वाला न होता। 48 और निस्संदेह यह अनुस्मरण है डरने वालों के लिए। 49 और हम जानते है कि तुममे इसके झुठलाने वाले है। 50 और वह झुठलाने वालों के लिए पछतावा है। 51 और यह निश्चित सत्य है। 52 अतः तुम अपने महान पालनहार के नाम की स्तुति करों। 
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अनुवादक - मौलाना वहीदुद्दीन खान  

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Qur'an 68:52