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रविवार, 21 जून 2020

68 अल - कलम (The Pen or The Noon)

68 अल - कलम (The Pen or The Noon)
*शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यंत दयावान है। 
1 नून., सौगन्ध है कलम की और जो कुछ लोग लिखते है। 2 तुम अपने पालनहार की कृपा से दीवाने नहीं हो। 3 और निस्सन्देह तुम्हारे लिए बदला है कभी समाप्त न होने वाला। 4 और निस्सन्देह तुम एक उत्तम चरित्र हो. 5 अतः अति शीघ्र तुम देखोगे और वह भी देखेंगे. 6 कि तुममे से किसको जुनून था. 7 तुम्हारा पालनहार ही भली भाँति जानता है, जो उसके मार्ग से भटका हुआ है, और वह मार्ग पर चलने वालो को भी भली भाँति जानता है। 
8 अतः तुम इन झुठलाने वालो का कहना न मानो। 9 वह चाहते है कि तुम नरम पड़ जाओ तो वह भी नरम पड  जाए, 10 और तुम ऐसे व्यक्ति का कहना न मानो जो बहुत सौंगंधे खाने वाला हो, हीन  हो। 11 व्यंग कसने वाला हो, चुगली लगाता (पीठ पीछे बुराई करना) फिरता हो।  12 अच्छे काम से रोकने वाला हो, सीमा का उल्लंघन करने वाला हो, बेईमानी करनेवाला हो। 13 पत्थर दिल हो, इससे बढ़ कर अधम हो। 14 इस कारण  से कि वह पूँजी और संतान वाला है।   15 जब उसको हमारी आयते पढ़कर सुनायी जाती है तो वह कहता है कि यह अगलो की प्रमाणहीन बाते है। 16 शीघ्र ही हम उसकी नाक पर दाग लगायेंगे। 
17 हमने उनको परीक्षा में डाला है, जिस प्रकार हमने बाग़ वालो को परीक्षा में डाला था। जबकि उन्होंने सौंगंध खाई कि वह सुबह सवेरे अवश्य उसका फल तोड़ लेते। 18 और कुछ भी शेष न छोड़ेंगे। 19 अतः उस बाग़ पर तेरे पालनहार की ओर से एक फेरने वाला फिर गया और वह सो रहे थे। 20 फिर सुबह को वह ऐसा रह गया जैसे कटी हुई फसल। 21 अतः सुबह को उन्होंने एक दूसरे को पुकारा। 22 कि अपने खेत पर सवेरे चलो यदि तुमको फल तोडना है। 23 फिर वह चल पड़े और वह आपस में चुपके-चुपके कह रहे थे। 24 कि आज कोई निर्धन तुम्हारे पास बाग़ में न आने पाये। 25 और वह अपने को न देने पर सक्षम समझकर चले। 26  फिर जब बाग़ को देखा तो कहा कि हम रास्ता भूल गये। 27 बल्कि हम वंचित हो गए। 28 उनमे जो बेहतर व्यक्ति था उसने कहा, मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम लोग स्तुति क्यों नहीं करते। 29 उन्होंने कहा कि हमारा पालनहार पवित्र है। निस्संदेह हम अत्याचारी थे। 30 फिर वह आपस में एक दूसरे को आरोप लगाने लगे। 31 उन्होंने कहा, अफ़सोस है हम पर, निस्संदेह हम सीमा का उल्लंघन करने वाले लोग थे। 32 संभवतः हमारा पालनहार हमको इससे अच्छा बाग़ इसके बदले में दे दे, हम उसी की ओर लौटते है। 33 इसी प्रकार आती है यातना, और परलोक की यातना इससे भी बड़ी है, काश यह लोग जानते। 
34 निस्संदेह डरने वालो के लिए उनके पालनहार के पास नेमत के बाग़ है। 35 क्या हम आज्ञाकारियो को अवज्ञाकारियों के बराबर कर देंगे। 36 तुम्हे क्या हुआ, तुम कैसा निर्णय करते हो। 37 क्या तुम्हारे पास कोई किताब है जिसमे तुम पढ़ते हो। 38 इसमें तुम्हारे लिए वह है जिसको तुम पसंद करते हो। 39 क्या तुम्हारे लिए हमारे ऊपर सौंगंधे है क़ियामत तक शेष रहने वाली कि तुम्हारे लिए वही कुछ है जो तुम निर्णय करो। 40 इनसे पूछो कि इनमे से कौन उसका जिम्मेदार है। 41 क्या उनके लिए कुछ साझीदार है, तो वह आपने साझीदारों को लाये यदि वह सच्चे हो।
42 जिस दिन सच्चाई पर से पर्दा उठाया जायेगा और लोग सजदे के लिए बुलाये जायेंगे तो वह सजदा न कर सकेंगे। 43 उनकी निगाहें झुकी हुई होंगी उन पर अनादर छाया होता, और वह सजदा के लिए बुलाये जाते थे। और वह हष्ट पुष्ट थे। 44  अतः छोडो मुझको और उनको जो इस वाणी को झुठलाते है,  हम उनको धीरे-धीरे ला रहे है जहाँ से वह नहीं जानते। 45 और मै उनको अवकाश दे रहा हूँ, निस्संदेह मेरी चाल बहुत मजबूत है। 
46 क्या तुम इनसे क्षतिपूर्ति माँगते हो कि वह उसके अर्थदंड से दबे जा रहे है। 47 अथवा उनके पास परोक्ष है अतः वह लिख रहे है। 48 अतः अपने पालनहार  के निर्णय तक धैर्य रखो और मछली वाले की भाँति न बन जाओ, जब उसने पुकारा और वह दुःख से भरा हुआ था। 49 यदि उसके पालनहार की कृपा उसके साथ न होती तो वह निन्दित होकर चटियल मैदान में फेंक दिया जाता। 50 फिर उसके पालनहार ने उसको सम्मानित किया, अतः उसको सदाचारियों में सम्मिलित कर दिया। 51 और ये अवज्ञाकारी लोग जब उपदेश को सुनते है तो इस प्रकार तुमको देखते है मानो अपनी दृष्टी से तुमको फिसला देंगे, और कहते है यह अवश्य दीवाना है। 52 और वह संसार वालो के लिए मात्रा एक उपदेश है।     

अनुवादक - मौलाना वहीदुद्दीन खां 
गुडवर्ड बुक्स 

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Qur'an 68:52