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सोमवार, 13 दिसंबर 2021

हूद अलैहिस्सलाम और आद

हूद अलैहिस्सलाम और आद

(फारूक खान और मो. अहमद इनका अनुवाद)

Maulana Azizul Haque al-Umari(इनका अनुवाद)

🌎7:65 (और इसी प्रकार) आद की ओर उनके भाई हूद को (भेजा)। उसने कहाः हे मेरी जाति! अल्लाह की इबादत (वंदना) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम (उसकी अवज्ञा से) नहीं डरते? [1] 

[1]नूह़ की जाति के पश्चात अरब में आद जाति का उत्थान हूआ। जिस का निवास स्थान अह़क़ाफ़ का क्षेत्र था। जो ह़िजाज तथा यमामा के बीच स्थित है। उन की आबादियाँ उमान से ह़ज़रमौत और इराक़ तक फैली हुई थीं।

🌎7:66 (इसपर) उनकी जाति में से उन प्रमुखों ने कहा, जो काफ़िर हो गये कि हमें ऐसा लग रहा है कि तुम नासमझ हो गये हो और वास्तव में हम तुम्हें झूठों में समझ रहे हैं। 

🌎7:67 उसने कहाः हे मेरी जाति! मुझमें कोई नासमझी की बात नहीं है, परन्तु मैं तो संसार के पालनहार का रसूल (संदेशवाहक) हूँ। 

🌎7:68 मैं तुम्हें अपने पालनहार का संदेश पहुँचा रहा हूँ और वास्तव में मैं तुम्हारा भरोसा करने योग्य शिक्षक हूँ। 

🌎7:69 क्या तुम्हें इसपर आश्चर्य हो रहा है कि तुम्हारे पालनहार की शिक्षा, तुम्हीं में से एक पुरुष द्वारा तुम्हारे पास आ गई है, ताकि वह तुम्हें सावधान करे? तथा याद करो कि अल्लाह ने नूह़ की जाति के पश्चात तुम्हें धरती में अधिकार दिया है और तुम्हें अधिक शारीरिक बल दिया है। अतः अल्लाह के पुरस्कारों को याद करो। संभवतः तुम सफल हो जाओगे। [1] 

[1]अर्थात उस के आज्ञाकारी तथा कृतज्ञ बनो।

🌎7:70 उन्होंने कहाः क्या तुम हमारे पास इसलिए आये हो कि हम केवल एक ही अल्लाह की इबादत (वंदना) करें और उन्हें छोड़ दें, जिनकी पूजा हमारे पूर्वज करते आ रहे हैं? तो वो बात हमारे पास ला दो, जिससे हमें डरा रहे हो, यदि तुम सच्चे हो? 

🌎7:71 उसने कहाः तुमपर तुम्हारे पालनहार का प्रकोप और क्रोध आ पड़ा है। क्या तुम मुझसे कुछ (मूर्तियों के) नामों के विषय में विवाद कर रहे हो, जिनका तुमने तथा तुम्हारे पूर्वजों ने (पूज्य) नाम रखा है, जिसका कोई तर्क (प्रमाण) अल्लाह ने नहीं उतारा है? तो तुम (प्रकोप की) प्रतीक्षा करो और तुम्हारे साथ मैं भी प्रतीक्षा कर रहा हूँ। 

🌎7:72 फिर हमने उसे और उसके साथियों को बचा लिया तथा उनकी जड़ काट दी, जिन्होंने हमारी आयतों (आदेशों) को झुठला दिया था और वे ईमान लाने वाले नहीं थे। 
(Qur'an 7:65-72)
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🌎11:50 और "आद" (जाति) की ओर उनके भाई हूद को भेजा, उसने कहाः हे मेरी जाति को लोगो! अल्लाह की इबादत (वंदना) करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं है। तुम इसके सिवा कुछ नहीं हो कि झूठी बातें घड़ने वाले हो। [1] 

[1]अर्थात अल्लाह के सिवा तुमने जो पूज्य बना रखे हैं वह तुम्हारे मन घड़त पूज्य हैं।

🌎11:51 हे मेरी जाति के लोगो! मैं तुमसे इसपर कोई बदला नहीं चाहता; मेरा पारिश्रमिक (बदला) उसी (अल्लाह) पर है, जिसने मुझे पैदा किया है। तो क्या तुम (इतनी) बात भी नहीं समझते? [1] 

[1]अर्थात यदि तुम समझ रखते तो अवश्य सोचते कि एक व्यक्ति अपने किसी संसारिक स्वार्थ के बिना क्यों हमें रातो दिन उपदेश दे रहा है और सारे दुःख झेल रहा है? उस के पास कोई ऐसी बात अवश्य होगी जिस के लिये अपनी जान जोखिम में डाल रहा है।

🌎11:52 हे मेरी जाति के लोगो! अपने पालनहार से क्षमा माँगो। फिर उसकी ओर ध्यानमग्न हो जाओ। वह आकाश से तुमपर धारा प्रवाह वर्षा करेगा और तुम्हारी शक्ति में अधिक शक्ति प्रदान करेगा और अपराधी होकर मुँह न फेरो। 

🌎11:53 उन्होंने कहाः हे हूद! तुम हमारे पास कोई स्पष्ट (खुला) प्रमाण नहीं लाये तथा हम तुम्हारी बात के कारण अपने पूज्यों को त्यागने वाले नहीं हैं और न हम तुम्हारा विश्वास करने वाले हैं। 

🌎11:54 हम तो यही कहेंगे कि तुझे हमारे किसी देवता ने बुराई के साथ पकड़ लिया है। हूद ने कहाः मैं अल्लाह को (गवाह) बनाता हूँ और तुम भी साक्षी रहो कि मैं उस शिर्क (मिश्रणवाद) से विरक्त हूँ, जो तुम कर रहे हो। 

🌎11:55 उस (अल्लाह) के सिवा। तुम सब मिलकर मेरे विरुध्द षड्यंत्र रच लो, फिर मुझे कुछ भी अवसर न दो। [1] 

[1] अर्थात तुम और तुम्हारे सब देवी-देवता मिल कर भी मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकते। क्यों कि मेरा भरोसा जिस अल्लाह पर है पूरा संसार उस के नियंत्रण में है, उस के आगे किसी की शक्ति नहीं कि किसी का कुछ बिगाड़ सके। 

🌎11:56 वास्तव में, मैंने अल्लाह पर, जो मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है, भरोसा किया है। कोई चलने वाला जीव ऐसा नहीं, जो उसके अधिकार में न हो, वास्तव में, मेरा पालनहार सीधी राह पर है। [1] 

[1] अर्थात उस की राह अत्याचार की राह नहीं हो सकती कि तुम दुराचारी और कुपथ में रह कर सफल रहो और मैं सदाचारी रह कर हानि में पड़ूँ।

🌎11:57 फिर यदि तुम विमुख रह गये, तो मैंने तुम्हें वह उपदेश पहुँचा दिया है, जिसके साथ मुझे भेजा गया है और मेरा पालनहार तुम्हारा स्थान तुम्हारे सिवा किसी और जाति को दे देगा और तुम उसे कुछ हानि नहीं पहुँचा सकोगे, वास्तव में, मेरा पालनहार प्रत्येक चीज़ का रक्षक है। [1] 

[1]अर्थात तुम्हें ध्वस्त निरस्त कर देगा।
(Qur'an 11:50-57)
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🌎26:124 जब कहा उनसे, उनके भाई हूद नेः क्या तुम डरते नहीं हो? [1] 

[1]आद जाति के नबी हूद (अलैहिस्सलाम) को उन का भाई कहा गया है क्यों कि वह भी उन्हीं के समुदाय में से थे।

🌎26:125 वस्तुतः, मैं तुम्हारे लिए एक न्यासिक (अमानतदार) रसूल हूँ। 

🌎26:126 अतः, अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो। 

🌎26:127 और मैं तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है। 

🌎26:128 क्यों तुम बना लेते हो, हर ऊँचे स्थान पर एक यादगार भवन, व्यर्थ में? 

🌎26:129 तथा बनाते हो, बड़े-बड़े भवन, जैसे कि तुम सदा रहोगे। 

🌎26:130 और जबकिसी को पकड़ते हो, तो पकड़ते हो, महा अत्याचारी बनकर। 

🌎26:131 तो अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो। 

🌎26:132 तथा उससे भय रखो, जिसने तुम्हारी सहायता की है उससे, जो तुम जानते हो। 

🌎26:133 उसने सहायता की है तुम्हारी चौपायों तथा संतान से। 

🌎26:134 तथा बाग़ों (उद्यानो) तथा जल स्रोतों से। 

🌎26:135 मैं तुमपर डरता हूँ, भीषण दिन की यातना से। 

🌎26:136 उन्होंने कहाः नसीह़त करो या न करो, हमपर सब समान है। 

🌎26:137 ये बात तो बस प्राचीन लोगों की नीति है। [1] 

[1]अर्थात प्राचीन युग से होती चली आ रही है।

🌎26:138 और हम उनमें से नहीं हैं, जिन्हें यातना दी जायेगी।
(Qur'an 26:124:138)
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🌎46:21 तथा याद करो आद के भाई (हूद) को। जब उसने अपनी जाति को सावधान किया, अह़्क़ाफ़[1] में, जबकि गुज़र चुके सावधान करने वाले (रसूल) उसके पहले और उसके पश्चात् कि इबादत (वंदना) न करो अल्लाह के अतिरिक्त की। मैं डरता हूँ तुमपर, एक बड़े दिन की यातना से। 

[1]इस में मक्का के प्रमुखों को जिन्हें अपने धन तथा बल पर बड़ा गर्व था अरब क्षेत्र की एक प्राचीन जाति की घटना सुनाने को कहा जा रहा है जो बड़ी सम्पन्न तथा शक्तिशाली थी। अह़्क़ाफ़, अर्थात ऊँचा रेत का टीला है। यह जाति उसी क्षेत्र में निवास करती थी।

🌎46:22 तो उन्होंने कहा कि क्या तुम हमें फेरने आये हो हमारे पूज्यों से? तो ले आओ हमारे पास, जिसकी हमें धमकी दे रहे हो, यदि तुम सच्चे हो। 

🌎46:23 हूद ने कहाः उसका ज्ञान तो अल्लाह ही को है और मैं तुम्हें वही उपदेश पहुँचा रहा हूँ, जिसके साथ मैं भेजा गया हूँ। परन्तु, मैं देख रहा हूँ तुम्हें कि तुम अज्ञानता की बातें कर रहे हो। 

🌎46:24 फिर जब उन्होंने देखा एक बादल आते हुए अपनी वादियों की ओर, तो कहाः ये एक बादल है हमपर बरसने वाला। बल्कि ये वही है, जिसकी तुमने जल्दी मचायी है। ये आँधी है, जिसमें दुःखदायी यातना है। [1] 

[1]ह़दीस मे है कि जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बादल या आँधी देखते तो व्याकूल हो जाते। आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहाः अल्लाह के रसूल! लोग बादल देख कर वर्षा की आशा में प्रसन्न होते हैं और आप क्यों व्याकूल हो जाते हैं? आप ने कहाः आइशा! मुझे भय रहता है कि इस में कोई यातना न हो? एक जाति को आँधी से यातना दी गई। और एक जाति ने यातना देखी तो कहाः यह बादल हम पर वर्षा करेगा। 

🌎46:25 वह विनाश कर देगी प्रत्येक वस्तु को अपने पालनहार के आदेश से, तो वे हो गये ऐसे कि नहीं दिखाई देता था कुछ, उनके घरों के अतिरिक्त। इसी प्रकार, हम बदला दिया करते हैं अपराधी लोगों को। 
(Qur'an 46:21-25)
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🌎11:89 हे मेरी जाति के लोगो! तुम्हें मेरा विरोध इस बात पर न उभार दे कि तुमपर वही यातना आ पड़े, जो नूह़ की जाति, हूद की जाति अथवा सालेह़ की जाति पर आई और लूत की जाति तुमसे कुछ दूर नहीं है। 
(Qur'an 11:89)
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Qur'an 68:52