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बुधवार, 15 दिसंबर 2021

इस्लाम सबसे पुराना दीन (धर्म) पार्ट 2

📗🌎इस्लाम सबसे पुराना दीन (धर्म)....पार्ट 2
🖊️हमने नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा। और वह पचास साल कम एक हज़ार वर्ष उनके बीच रहा। अन्ततः उनको तूफ़ान ने इस दशा में आ पकड़ा कि वे अत्याचारी था।
फिर उसको और नौकावालों को हमने बचा लिया और उसे सारे संसार के लिए एक निशानी बना दिया।
और इबराहीम को भी भेजा, जबकि उसने अपनी क़ौम के लोगों से कहा, "अल्लाह की बन्दगी करो और उसका डर रखो। यह तुम्हारे लिए अच्छा है, यदि तुम जानो। 
(29:14 -16)

🖊️नूह ने हमको पुकारा था, तो हम कैसे अच्छे हैं निवेदन स्वीकार करनेवाले! 
हमने उसे और उसके लोगों को बड़ी घुटन और बेचैनी से छुटकारा दिया। 
और हमने उसकी संतति (औलाद व अनुयायी) ही को बाक़ी रखा। 
और हमने पीछे आनेवाली नस्लों में उसका अच्छा ज़िक्र छोड़ा 
कि "सलाम है नूह पर सम्पूर्ण संसारवालों में!"
निस्संदेह हम उत्तमकारों को ऐसा ही बदला देते हैं।
निश्चय ही वह हमारे ईमानवाले बन्दों में से था। 
फिर हमने दूसरों को डूबो दिया। 
(37:75-82)

🖊️उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और मेखोंवाले फ़िरऔन ने झुठलाया।
और समूद और लूत की क़ौम और 'ऐकावाले' भी, ये हैं वे दल। 
उनमें से प्रत्येक ने रसूलों को झुठलाया, तो मेरी ओर से दंड अवश्यम्भावी होकर रहा। 
(38:12-14)

🖊️उनसे पहले नूह की क़ौम ने और उनके पश्चात दूसरे गरोहों ने भी झुठलाया और हर समुदाय के लोगों ने अपने रसूलों के बारे में इरादा किया कि उन्हें पकड़ लें और वे असत्य का सहारा लेकर झगड़े, ताकि उसके द्वारा सत्य को उखाड़ दें। अन्ततः मैंने उन्हें पकड़ लिया। तो कैसी रही मेरी सज़ा! (40:5 )

🖊️उस व्यक्ति ने, जो ईमान ला चुका था, कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मुझे भय है कि तुमपर (विनाश का) ऐसा दिन न आ पड़े, जैसा दूसरे विगत समुदायों पर आ पड़ा था। 
जैसे नूह की क़ौम और आद और समूद और उनके पश्चात्वर्ती लोगों का हाल हुआ। अल्लाह तो ऐसा नहीं कि बन्दों पर कोई ज़ुल्म करना चाहे। (40:30- 31 )

🖊️उसने तुम्हारे लिए वही धर्म निर्धारित किया जिसकी ताकीद उसने नूह को की थी।" और वह (जीवन्त आदेश) जिसकी प्रकाशना हमने तुम्हारी ओर की है और वह जिसकी ताकीद हमने इबराहीम और मूसा और ईसा को की थी यह है कि "धर्म को क़ायम करो और उसके विषय में अलग-अलग न हो जाओ।" बहुदेववादियों को वह चीज़ बहुत अप्रिय है, जिसकी ओर तुम उन्हें बुलाते हो। अल्लाह जिसे चाहता है अपनी ओर छाँट लेता है और अपनी ओर का मार्ग उसी को दिखाता है जो उसकी ओर रुजू करता है। ( 42:13 )

🖊️उनसे पहले नूह की क़ौम, 'अर्-रस' वाले, समूद, 
आद, फ़िरऔन , लूत के भाई, 
'अल-ऐका' वाले और तुब्बा के लोग भी झुठला चुके हैं। प्रत्येक ने रसूलों को झुठलाया। अन्ततः मेरी धमकी सत्यापित होकर रही। (50:12-14 )

🖊️और इससे पहले नूह की क़ौम को भी पकड़ा। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे। (51: 46 )

🖊️और यह कि उसी ने प्राचीन आद को विनष्ट किया; 
और समूद को भी। फिर किसी को बाक़ी न छोड़ा। 
और उससे पहले नूह की क़ौम को भी। बेशक वे ज़ालिम और सरकश थे। 
उलट जानेवाली बस्ती को भी फेंक दिया। 
तो ढँक लिया उसे जिस चीज़ ने ढँक लिया; 
(53:50-54 )

🖊️आद ने भी झुठलाया, फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरा डराना? 
निश्चय ही हमने एक निरन्तर अशुभ दिन में तेज़ प्रचंड ठंडी हवा भेजी, उसे उनपर मुसल्लत कर दिया, तो वह लोगों को उखाड़ फेंक रही थी। 
मानो वे उखड़े खजूर के तने हों। 
फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे? 
(54:18- 21 )

🖊️हमने नूह और इबराहीम को भेजा और उन दोनों की सन्तान में पैग़म्बरी और क़िताब रख दी। फिर उनमें से किसी ने तो संमार्ग अपनाया; किन्तु उनमें से अधिकतर अवज्ञाकारी हैं। ( 57:26 )

🖊️समूद और आद ने उस खड़खड़ा देनेवाली (घटना) को झुठलाया, 
फिर समूद तो एक हद से बढ़ जानेवाली आपदा से विनष्ट किए गए। 
और रहे आद, तो वे एक अनियंत्रित प्रचंड वायु से विनष्ट कर दिए गए। 
अल्लाह ने उसको सात रात और आठ दिन तक उन्मूलन के उद्देश्य से उनपर लगाए रखा। तो लोगों को तुम देखते कि वे उसमें पछाड़े हुए ऐसे पड़े हैं मानो वे खजूर के जर्जर तने हों। 
अब क्या तुम्हें उनमें से कोई शेष दिखाई देता है? 
(69:4-8)

To be continued... Inshallah...

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Qur'an 68:52